कवयित्री एवं समाजसेविका रश्मि शर्मा को दी भावभिन्नि श्रद्धांजलि
मंडी, 27 अक्टूबर (हि.स.)। सुकेत साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद की ओर से शुकदेव वाटिका में स्थित हिमाचल प्रदेश पर्यटन निगम के रेस्तरां में एक शोकसभा का आयोजन किया गया। उदीयमान कवयित्री एवं समाज सेविका रश्मि शर्मा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। इस अवसर पर मंडी व सुंदरनगर के अनके साहित्यकार मौजूद रहे। रश्मि शर्मा जो हिमाचल की प्रख्यात लोकगायिका एवं कवयित्री रूपेश्वरी शर्मा की बड़ी बेटी थी, जिनका लंबी बीमारी के चलते चंडीगढ़ में निधन हो गया।
सुकेत साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष गंगाराम राजी ने बताया कि रश्मि शर्मा एक संभावनाशील रचनाकार और समर्पित समाजसेवका थी। अपने जवान बेटे और पति के देहांत के बाद वे अंदर से टूट चुकी थी और अपना जीवन समाजसेवा के प्रति समर्पित कर दिया था। रोटरी क्लब से जुड़कर उन्होंने बहुत ही सराहनीय कार्य किए । अपने अंर्तमन की पीड़ा को शब्दों में ढालते हुए कविताएं लिखनी शुरू की। उनका पहला काव्य संग्रह मैं तुम्हें अंतस में छुपा लूंगी जो उनके दिवंगत बेटे स्वप्निल को समर्पित था प्रकाशित हुआ है। इसके अलावा उनका दूसरा काव्यसंग्रह भी तैयार था, मगर उसके प्रकाशित होने से पहले ही वे इस दुनिया को छोड़ कर चली गई। इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कहा कि रश्मि शर्मा बहुत ही मिलनसार और संवेदनशील रचनाकार थी। उनका इस तरह से असमय चले जाना दु:खद है।
वरिष्ठ साहित्यकार मुरारी शर्मा ने कहा कि रश्मि शर्मा के रूप में हमने एक संभावनाशील कवि और समर्पित समाजसेविका को खो दिया। वे हंसमुख इंसान, संवेदनशील कवयित्री और वंचितवर्ग की पक्षधर थी। लोक साहित्यकार कृष्णचंद्र महादेविया ने उनके सामाजिक क्षेत्र में दिए गए योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी हमारे सामने हैं। इस अवसर पर साहित्यकार पवन चौहान, डा. राकेश शर्मा, रततन लाल शर्मा, सुरेंद्र मिश्रा आदि ने भी रश्मि शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

