शिमला : मॉल रोड-रिज पर दिखने लगे दुनिया के अजूबे, स्क्रैप से बनी कलाकृतियां बनीं नया आकर्षण

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शिमला : मॉल रोड-रिज पर दिखने लगे दुनिया के अजूबे, स्क्रैप से बनी कलाकृतियां बनीं नया आकर्षण


शिमला : मॉल रोड-रिज पर दिखने लगे दुनिया के अजूबे, स्क्रैप से बनी कलाकृतियां बनीं नया आकर्षण


शिमला, 19 जुलाई (हि.स.)। राजधानी शिमला की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक रिज मैदान और मॉल रोड पर अब सैर करने आने वाले पर्यटकों को दुनिया के सात अजूबों की झलक भी देखने को मिलेगी। शहर के लोहे के कबाड़ से तैयार की गई इन विशाल कलाकृतियों को चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जा रहा है। इनमें से चार प्रतिकृतियां अपनी तय जगह पर लग चुकी हैं, जबकि बाकी तीन को स्थापित करने का काम जारी है।

शिमला नगर निगम का कहना है कि इसी महीने सभी कलाकृतियों को लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इन प्रतिकृतियों की खास बात यह है कि इन्हें पूरी तरह लोहे के कबाड़ से तैयार किया गया है। इसी कारण इनका वजन भी काफी अधिक है और इन्हें स्थापित करने के लिए मजबूत नींव तैयार करनी पड़ी है।

शहर के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में शामिल स्कैंडल प्वाइंट पर देश के इकलौते अजूबे ताजमहल की प्रतिकृति स्थापित कर दी गई है। नगर निगम के फाउंटेन पार्क में लगाए गए इस ताजमहल के साथ लोग तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। इसके अलावा रानी झांसी पार्क में एफिल टावर, गेयटी थिएटर के पास लीनिंग टॉवर ऑफ पीसा और रिज के नए परिसर में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की प्रतिकृति भी स्थापित की जा रही है। इन चारों स्थानों पर अब आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों की नजर सबसे पहले इन नई कलाकृतियों पर पड़ रही है।

नगर निगम अब बाकी तीन अजूबों को लगाने के काम में जुटा है। रिज के नए परिसर में पिरामिड ऑफ गीजा की प्रतिकृति स्थापित की जा रही है। झांसी पार्क चौक, मालरोड पर क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिकृति लगाई जाएगी। ढली की नई टनल के बाहर बने चौराहे पर कोलोसियम स्थापित करने का काम भी जारी है। इन सभी स्थानों पर पहले मजबूत आधार तैयार किया गया है, क्योंकि लोहे के कबाड़ से बनी ये कलाकृतियां काफी भारी हैं और इन्हें सुरक्षित तरीके से स्थापित करना जरूरी है।

नगर निगम के अनुसार इन सातों प्रतिकृतियों का निर्माण दिल्ली में किया गया है। निर्माण में शहर से एकत्र किए गए लोहे के कबाड़ का उपयोग किया गया है। पुराने लोहे के सामान को नया रूप देकर तैयार की गई ये कलाकृतियां पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं। नगर निगम का मानना है कि बेकार समझे जाने वाले कबाड़ का इस तरह उपयोग शहर को नया आकर्षण देने के साथ पुनर्चक्रण की सोच को भी बढ़ावा देगा।

इन प्रतिकृतियों के लिए शहर में स्थानों का चयन पहले ही किया गया था। हर कलाकृति को ऐसे स्थान पर लगाया जा रहा है, जहां पर्यटक सबसे अधिक पहुंचते हैं। नगर निगम की योजना है कि इन स्थानों को सेल्फी प्वाइंट के रूप में भी विकसित किया जाए। उम्मीद है कि सातों अजूबे स्थापित होने के बाद शिमला आने वाले पर्यटक इन स्थानों पर रुककर तस्वीरें लेने के साथ इन कलाकृतियों को भी करीब से देख सकेंगे।

नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि दुनिया के सात अजूबों की ये प्रतिकृतियां शहर की सुंदरता में नया आयाम जोड़ेंगी। उनका कहना है कि इनसे शिमला आने वाले पर्यटकों को एक नया आकर्षण मिलेगा। उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर काम बाकी है, वहां स्थापना का कार्य तेजी से चल रहा है और इसी महीने सभी सातों अजूबों को उनकी तय जगह पर स्थापित कर दिया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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