6 महीने का निर्णय नहीं, स्थायी सुधार जरूरी: शांता कुमार

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6 महीने का निर्णय नहीं, स्थायी सुधार जरूरी: शांता कुमार


6 महीने का निर्णय नहीं, स्थायी सुधार जरूरी: शांता कुमार


शिमला, 18 मार्च (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने हिमाचल प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार द्वारा कुछ नेताओं का कैबिनेट रैंक वापस लेना स्वागत योग्य कदम तो है, लेकिन यह केवल अस्थायी राजनीतिक निर्णय नहीं होना चाहिए।

शांता कुमार ने बुधवार को एक बयान में कहा कि सरकार ने यह फैसला केवल छह महीने के लिए लिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कदम दीर्घकालिक बचत के बजाय तात्कालिक राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या छह महीने बाद प्रदेश का आर्थिक संकट समाप्त हो जाएगा?

शांता कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये के कर्ज के बोझ तले दबी हुई है, जिसका मुख्य कारण लगातार बढ़ते खर्चे और आय के साधनों को बढ़ाने में विफलता है। उन्होंने कहा कि खर्चों में कटौती के साथ-साथ संसाधनों को बढ़ाने की दिशा में भी ठोस प्रयास होने चाहिए।

उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार एक विशाल संस्था होती है, जिसमें एक-एक पैसे की बचत से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। मैंने स्वयं अपने कार्यकाल में मितव्ययिता अपनाकर करोड़ों की बचत की और प्रदेश में विकास कार्यों को गति दी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि अनुभवी नेताओं की एक समिति बनाकर सभी विभागों में खर्चों की समीक्षा की जाए और बचत के स्थायी उपाय लागू किए जाएं। इसके साथ ही आय बढ़ाने के नए स्रोतों की भी तलाश की जानी चाहिए।

बिजली परियोजनाओं का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल की पनबिजली योजनाओं में रॉयल्टी का सिद्धांत उन्होंने ही लागू किया था, लेकिन वर्षों में बिजली के दाम बढ़ने के बावजूद रॉयल्टी में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई। उन्होंने प्रदेश सरकार से केंद्र के समक्ष यह मुद्दा मजबूती से उठाने की मांग की।

इसके अलावा उन्होंने जोगिंदरनगर स्थित शानन बिजली परियोजना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह परियोजना हिमाचल की भूमि और जल संसाधनों पर आधारित होने के बावजूद पंजाब के नियंत्रण में है, जो प्रदेश के साथ अन्याय है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष मिलकर एक संयुक्त समिति बनाएं और केंद्र सरकार से इसे हिमाचल को सौंपने के लिए संघर्ष करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

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