एचपीयू में भर्ती और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप, एसएफआई ने मांगी न्यायिक जांच

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एचपीयू में भर्ती और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप, एसएफआई ने मांगी न्यायिक जांच


शिमला, 30 जून (हि.स.)। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) इकाई ने विश्वविद्यालय में कथित भर्ती अनियमितताओं, विश्वविद्यालय अधिनियम की अवहेलना, प्रशासनिक भेदभाव और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कुलपति को दो ज्ञापन सौंपे हैं। संगठन ने मांग की है कि इन मामलों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

एसएफआई ने अपने ज्ञापनों में दावा किया है कि विश्वविद्यालय में विभिन्न नियुक्तियों के दौरान भर्ती नियमों और निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं किया गया। संगठन का कहना है कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर कुछ नियुक्तियों में आवेदन और दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई। एसएफआई के अनुसार विश्वविद्यालय ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान स्पष्ट किया था कि केवल अंतिम तिथि तक जारी और उपलब्ध दस्तावेजों को ही मान्य माना जाएगा, लेकिन कुछ मामलों में बाद की तारीखों के दस्तावेजों को भी विचार में लिया गया। संगठन ने आरोप लगाया है कि इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं और समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन हो सकता है।

संगठन ने एक अन्य नियुक्ति का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि आरक्षित वर्ग से जुड़े दस्तावेज आवेदन की अंतिम तिथि के काफी समय बाद जारी हुए थे। एसएफआई का आरोप है कि यदि यह तथ्य सही है तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित अभ्यर्थी को आरक्षित वर्ग का लाभ किस वैधानिक आधार पर दिया गया। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस संबंध में सभी आदेश और अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग की है।

दूसरे ज्ञापन में एसएफआई ने विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 की एक धारा के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया है। संगठन का आरोप है कि हाल ही में आयोजित एक विदाई समारोह में शिक्षक की परिभाषा और मान्यता से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके साथ ही एक महिला शिक्षिका को समारोह में शामिल न किए जाने को एसएफआई ने संस्थागत भेदभाव और प्रशासनिक असंवेदनशीलता का उदाहरण बताया है।

एसएफआई ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति से जुड़े किसी भी संकट का बोझ छात्रों पर फीस वृद्धि के रूप में नहीं डाला जाना चाहिए। संगठन ने हाल में बढ़ाई गई फीस वापस लेने और राज्य सरकार से विशेष वित्तीय सहायता पैकेज लेने की मांग की है। एसएफआई का दावा है कि उसके पास आरटीआई के माध्यम से प्राप्त करीब 13 हजार पृष्ठों के दस्तावेज उपलब्ध हैं और आने वाले समय में इन अभिलेखों के आधार पर अन्य मामलों का भी खुलासा किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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