प्रधानाचार्य पदोन्नति में प्रवक्ताओं के लिए 95.5 फीसदी कोटा मांगा, 50:50 व्यवस्था बदलने की उठी मांग

WhatsApp Channel Join Now

शिमला, 30 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में प्रधानाचार्य बनने की पदोन्नति व्यवस्था में बदलाव की मांग तेज हो गई है। स्कूल प्रवक्ता संघ ने प्रवक्ता और मुख्याध्यापक कैडर के बीच लागू 50:50 कोटे को बदलकर प्रवक्ता कैडर के लिए 95.5 प्रतिशत कोटा तय करने की मांग की है। संघ ने कहा है कि प्रवक्ता कैडर में कर्मचारियों की संख्या मुख्याध्यापक कैडर की तुलना में काफी अधिक है, इसलिए पदोन्नति का अनुपात भी कैडर की वास्तविक संख्या के आधार पर तय होना चाहिए।

मंडी जिला के सुंदरनगर में रविवार को हुई स्कूल प्रवक्ता संघ की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बैठक में प्रदेशभर से करीब 250 प्रवक्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदेश अध्यक्ष अजय नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रवक्ताओं की लंबित मांगों पर चर्चा की गई और उनके समाधान के लिए आगे की रणनीति और रोडमैप तैयार किया गया।

संघ ने कहा कि मौजूदा 50:50 व्यवस्था में प्रवक्ता कैडर को उसकी संख्या के अनुपात में पदोन्नति का अवसर नहीं मिल रहा है। संघ ने मांग की कि प्रधानाचार्य पदोन्नति में प्रवक्ता कैडर के लिए 95.5 प्रतिशत और मुख्याध्यापक कैडर के लिए 4.5 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया जाए।

बैठक में प्रदेश के वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में लंबे समय से खाली पड़े प्रधानाचार्यों के पदों का मामला भी उठाया गया। संघ ने सरकार से लंबित प्रधानाचार्य पदोन्नति सूची तुरंत जारी करने की मांग की। संघ का कहना है कि कई स्कूलों में प्रधानाचार्य के पद खाली होने से स्कूलों के प्रशासनिक और शैक्षणिक काम प्रभावित हो रहे हैं।

प्रवक्ताओं ने लंबित वित्तीय लाभ का मुद्दा भी सरकार के सामने रखा। संघ ने 15 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान जल्द करने की मांग की। इसके साथ ही सातवें वेतन आयोग के लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग भी की गई।

संघ ने विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से नियुक्त प्रवक्ताओं के नियमितीकरण के लिए नीति बनाने की मांग की। संघ के अनुसार इन प्रवक्ताओं को सीमित सीधी भर्ती के माध्यम से नियमित करने का रास्ता तैयार किया जाना चाहिए।

बैठक में योग्य प्रवक्ताओं को महाविद्यालयों में सहायक आचार्य के पद पर पदोन्नति देने का मुद्दा भी उठाया गया। संघ ने कहा कि जो प्रवक्ता विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्धारित शैक्षणिक मानदंड पूरे करते हैं, उन्हें उनकी योग्यता और अनुभव के अनुरूप महाविद्यालयों में सहायक आचार्य बनने का अवसर दिया जाना चाहिए।

संघ ने सभी प्रवक्ताओं के लिए एक समान ‘स्कूल प्रवक्ता’ पदनाम लागू करने की मांग भी की। संघ का कहना है कि अलग-अलग पदनाम के कारण भ्रम की स्थिति पैदा होती है। सभी प्रवक्ताओं के लिए एक समान पदनाम होने से यह स्थिति खत्म होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story