हिमाचल में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों और विधायकों के वेतन का 50 से 20 फीसदी हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित, अधिसूचना जारी

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हिमाचल में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों और विधायकों के वेतन का 50 से 20 फीसदी हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित, अधिसूचना जारी


शिमला, 18 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और विधायकों के वेतन के एक हिस्से को अगले छह महीनों के लिए अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लागू कर दिया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग (संसदीय कार्य) ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर दी है। यह कदम राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए उठाया गया बताया गया है।

जारी अधिसूचना के अनुसार मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत, उपमुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन का 30 प्रतिशत तथा विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा अगले छह महीनों के लिए स्थगित रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह स्थगन अस्थायी होगा और राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार होने पर इसे बाद में जारी किया जाएगा।

अधिसूचना में कहा गया है कि वेतन के देय और स्थगित हिस्से को ई-सैलरी प्रणाली और वेतन पर्चियों में अलग-अलग स्पष्ट रूप से दर्शाया जाएगा, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही आयकर सहित सभी वैधानिक कटौतियां पहले की तरह पूर्ण वेतन राशि पर ही लागू रहेंगी, जिससे भविष्य में लेखा संबंधी किसी प्रकार की समस्या न आए। हालांकि स्थगित की जाने वाली राशि की गणना कर निर्धारण और अन्य निश्चित कटौतियों के बाद बची राशि के आधार पर की जाएगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन जनप्रतिनिधियों के वेतन से हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA) या मोटर कार एडवांस (MCA) की किस्तें कट रही हैं, उनके लिए अलग व्यवस्था लागू होगी। ऐसे मामलों में संबंधित जनप्रतिनिधि निर्धारित प्रारूप में ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) को लिखित सहमति दे सकते हैं। सहमति देने के बाद उनकी किस्तों की कटौती के पश्चात शेष वेतन राशि के आधार पर ही स्थगन की गणना की जाएगी।

अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि वेतन का स्थगित हिस्सा किसी प्रकार की स्थायी कटौती नहीं माना जाएगा। यह राशि बाद में राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को देखते हुए जारी की जाएगी। सरकार ने इसे सामूहिक प्रयास बताते हुए कहा है कि वित्तीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन के लिए यह कदम अस्थायी तौर पर उठाया गया है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 21 मार्च को वित्त वर्ष 2026-27 के बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और विधायकों के वेतन के हिस्से को स्थगित करने की घोषणा की थी। इसी बजट भाषण में उन्होंने उच्च अधिकारियों के वेतन में तीन प्रतिशत स्थगन का भी ऐलान किया था। हालांकि बाद में 15 अप्रैल को हिमाचल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने उच्च अधिकारियों के वेतन में तीन प्रतिशत स्थगन के फैसले को वापस लेने की घोषणा कर दी थी।

मुख्यमंत्री ने बजट भाषण के दौरान यह भी कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार को सीमित संसाधनों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए कई कठिन लेकिन जरूरी फैसले लेने पड़ रहे हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों के वेतन के एक हिस्से का अस्थायी स्थगन भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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