हिमाचल राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस 5 मार्च को भरेगी नामांकन, भाजपा भी उतार सकती है उम्मीदवार

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हिमाचल राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस 5 मार्च को भरेगी नामांकन, भाजपा भी उतार सकती है उम्मीदवार


हिमाचल राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस 5 मार्च को भरेगी नामांकन, भाजपा भी उतार सकती है उम्मीदवार


शिमला, 03 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस ने तय किया है कि उसका अधिकृत उम्मीदवार 5 मार्च को नामांकन दाखिल करेगा। उसी दिन नामांकन की अंतिम तारीख भी है। इसलिए पार्टी के भीतर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर दिल्ली में मंथन चल रहा है और आज शाम तक एलान हो सकता है।

नामांकन से पहले कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक 5 मार्च को सुबह 11 बजे बुलाई गई है। यह बैठक हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रूलिंग लाउंज में होगी। कैबिनेट मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि बैठक मुख्यमंत्री के निर्देश पर तय की गई है और सभी सीएलपी सदस्यों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है। इस बैठक में राज्यसभा सीट के लिए पार्टी की रणनीति और उम्मीदवार के नामांकन से जुड़े पहलुओं पर अंतिम सहमति बनने की उम्मीद है।

दिल्ली में पार्टी नेतृत्व स्तर पर उम्मीदवार चयन को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। जिन नामों पर चर्चा बताई जा रही है उनमें आनंद शर्मा, धनी राम शांडिल, रजनी पाटिल, प्रतिभा सिंह और गोकुल बुटेल शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस हिमाचल से कोई चौंकाने वाला उम्मीदवार भी घोषित कर सकती है। पार्टी इस बार पिछले अनुभवों को देखते हुए बेहद सतर्क नजर आ रही है और संगठनात्मक एकजुटता के साथ स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला लेने की तैयारी है।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश की इस एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए मतदान 16 मार्च को प्रस्तावित है। 68 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 28 विधायक हैं। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन पिछली बार के घटनाक्रम ने पार्टी को सतर्क रहने के लिए मजबूर किया है।

दरअसल, 2024 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को अप्रत्याशित हार झेलनी पड़ी थी। उस समय पार्टी ने अभिषेक मनु सिंघवी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बहुमत होने के बावजूद परिणाम उसके खिलाफ गया और भाजपा के हर्ष महाजन जीत गए थे। उस चुनाव में कांग्रेस के छह और तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस नेतृत्व को झटका दिया था और अब पार्टी इस बार किसी भी तरह की चूक से बचना चाहती है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भाजपा भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है। हालांकि भाजपा ने अभी आधिकारिक तौर पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन पार्टी रणनीतिक रूप से स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ऐसे में मुकाबला औपचारिक हो या रोचक, यह काफी हद तक कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा के बाद साफ होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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