शिमला रोपवे परियोजना: 13 स्टेशनों वाला बड़ा नेटवर्क, लागत बढ़कर 2,980 करोड़ रुपये तक पहुंची

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शिमला रोपवे परियोजना: 13 स्टेशनों वाला बड़ा नेटवर्क, लागत बढ़कर 2,980 करोड़ रुपये तक पहुंची


शिमला, 26 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बढ़ते ट्रैफिक दबाव से निपटने के लिए प्रस्तावित रोपवे और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से योजनाबद्ध इस परियोजना को अब अंतिम वित्तीय मंजूरी का इंतजार है, जबकि सरकार इसके लिए संसाधन जुटाने के विकल्पों पर काम कर रही है।

इस परियोजना की लागत में पिछले कुछ समय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पहले इसकी अनुमानित लागत करीब 1,556 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,980 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार का वित्तीय हिस्सा भी बढ़कर करीब 540 करोड़ रुपये हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस राशि की व्यवस्था के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, ताकि परियोजना को स्थायी और व्यावहारिक ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

यह योजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित की जानी है। केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग से इसे पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे परियोजना को नीतिगत समर्थन मिला है। अब राज्य स्तर पर वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। सरकार 80:20 के फंडिंग पैटर्न के तहत 80 प्रतिशत राशि बाहरी स्रोतों से जुटाने की योजना बना रही है और इसके लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक से सहयोग लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।

करीब एक दशक से लंबित इस परियोजना को अक्टूबर 2025 में वन स्वीकृति मिलने के बाद नई गति मिली। लगभग छह हेक्टेयर भूमि के उपयोग की अनुमति मिल चुकी है और तकनीकी प्रक्रियाएं भी काफी आगे बढ़ चुकी हैं। अधिकारियों के मुताबिक जैसे ही वित्तीय स्वीकृति मिलती है, परियोजना पर काम शुरू किया जा सकता है।

प्रस्तावित रोपवे करीब 13.65 किलोमीटर लंबा होगा और इसे बड़े शहरी रोपवे सिस्टम में गिना जा सकता है। इसमें 660 केबिन होंगे, जिनमें प्रत्येक में 10 यात्री बैठ सकेंगे। हर दिशा में प्रति घंटे लगभग 3,000 यात्रियों को ले जाने की क्षमता होगी और हर 2 से 3 मिनट में केबिन उपलब्ध रहने की व्यवस्था होगी।

इस परियोजना के तहत शहर के प्रमुख इलाकों तारा देवी, टूटीकंडी, आईएसबीटी, विक्ट्री टनल, रेलवे स्टेशन, सचिवालय, संजौली और आईजीएमसी सहित कुल 13 स्थानों को जोड़ा जाएगा। इससे शहर के भीतर आवाजाही तेज और सुगम होने की उम्मीद है, खासकर पर्यटन सीजन में लगने वाले जाम से राहत मिल सकती है।

दरअसल, पहाड़ी शहर होने के कारण शिमला में सड़कों का विस्तार सीमित है, ऐसे में रोपवे जैसी वैकल्पिक परिवहन प्रणाली दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकती है। यह न केवल यातायात दबाव कम करेगी, पर्यावरण के लिहाज से भी एक बेहतर विकल्प मानी जा रही है।

हालांकि सरकार इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए इच्छुक है, लेकिन आर्थिक दबाव और अन्य खर्चों के चलते इसकी फाइनेंसिंग में समय लग सकता है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो शिमला को ट्रैफिक की समस्या से राहत मिलने में और देरी हो सकती है।

राज्य सरकार का कहना है कि वह इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और वित्तीय चुनौतियों का समाधान तलाशने की दिशा में काम जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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