हिमाचल में सड़क हादसे घटे, रोड सेफ्टी ऑडिट नीति लागू करेगी सरकार
शिमला, 23 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में कमी दर्ज होने के बाद राज्य सरकार ने सड़क सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में नया कदम उठाया है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी आने के बाद सरकार ने लोक निर्माण विभाग के अधीन आने वाली सभी सड़क परियोजनाओं के लिए रोड सेफ्टी ऑडिट नीति लागू करने को मंजूरी दे दी है।
सरकार का कहना है कि इस नीति के जरिए सड़क निर्माण के हर चरण में सुरक्षा मानकों की जांच होगी और संभावित जोखिमों की पहले ही पहचान कर उन्हें दूर किया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में प्रदेश में 2,253 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो वर्ष 2024 में घटकर 2,107 रह गईं। इसी अवधि में सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या 892 से घटकर 806 हो गई। दुर्घटनाओं में घायल होने वालों की संख्या भी 3,449 से कम होकर 3,290 रह गई। सरकार का कहना है कि सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार किए गए प्रयासों का असर इन आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।
नई नीति के तहत किसी भी सड़क परियोजना का सुरक्षा ऑडिट पांच चरणों में किया जाएगा। इनमें व्यवहार्यता या प्रारंभिक डिजाइन, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), निर्माण के दौरान, सड़क को यातायात के लिए खोलने से पहले और पहले से बनी सड़कों का समय-समय पर होने वाला ऑडिट शामिल है।
शुरुआती चरण में सड़क के मार्ग, मोड़ों, चौराहों और मौजूदा सड़क नेटवर्क से जुड़ाव की जांच होगी। विस्तृत डिजाइन चरण में सड़क की बनावट, संकेतक, चिह्नांकन, प्रकाश व्यवस्था, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों की सुविधाओं तथा सुरक्षा अवरोधकों की समीक्षा की जाएगी। निर्माण के दौरान कार्यस्थल की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और पहले दिए गए सुझावों के पालन की जांच होगी। सड़क शुरू होने से पहले दिन और रात दोनों समय निरीक्षण किया जाएगा, जबकि पहले से बनी सड़कों का भी नियमित सुरक्षा ऑडिट होगा।
नीति के अनुसार सड़क सुरक्षा ऑडिट केवल भारतीय सड़क कांग्रेस से प्रमाणित रोड सेफ्टी ऑडिटर या ऐसे विभागीय अधिकारी और कर्मचारी करेंगे, जिन्होंने 15 दिन का प्रमाणन प्रशिक्षण पूरा किया हो और पर्वतीय सड़कों के निर्माण का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव हो। यह भी तय किया गया है कि ऑडिटर पूरी तरह स्वतंत्र होंगे और जिस परियोजना का ऑडिट करेंगे, उसके निर्माण या संचालन से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होगा।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में एक समर्पित रोड सेफ्टी सेल स्थापित किया जाएगा। यह सेल ऑडिट कार्यक्रम की निगरानी करेगा, योग्य ऑडिटरों का पैनल तैयार करेगा, अनुपालन रिपोर्टों की समीक्षा करेगा और अभियंताओं सहित अन्य संबंधित पक्षों के लिए प्रशिक्षण तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा। अभियंता-प्रमुख प्रत्येक तीन महीने में इसकी समीक्षा करेंगे।
सरकार ने यह भी तय किया है कि एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली हर सड़क परियोजना में कुल परियोजना लागत का एक प्रतिशत हिस्सा सड़क सुरक्षा ऑडिट पर खर्च किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल के सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, सक्षम और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सड़क परियोजना में मानव जीवन और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उनके अनुसार स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट को संस्थागत रूप देकर और सभी स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित कर सरकार सड़क सुरक्षा के प्रति सक्रिय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित सड़कें लोगों की जान बचाने के साथ प्रदेश में बेहतर संपर्क व्यवस्था और आर्थिक विकास को भी गति देंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

