जलवायु परिवर्तन के संकेत दे रहीं बादल फटने की घटनाएं, गैर-कार्बन उत्सर्जन पर वैज्ञानिक रिपोर्ट जारी

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शिमला, 24 फ़रवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ‘साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बन-डाईऑक्साइड एमीशंस: पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि राज्य में बढ़ती बादल फटने की घटनाएं, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों का सिकुड़ना जलवायु परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए ठोस सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर डावर इंडिया लिमिटेड और मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ औषधीय पौधों की खेती व संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु दो एमओए हस्ताक्षरित किए गए। डाबर के साथ हुए समझौते के तहत किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। विभिन्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों के अनुसार आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी, लोधर, जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला, पदम काष्ठ और अतीस जैसी प्रजातियों का वितरण किया जाएगा। वहीं सोलन में पांच वर्ष की अवधि के लिए चयनित औषधीय फसलों—हल्दी, अश्वगंधा, शतावरी, तुलसी, चिरायता और हिमालयन जेंटियन—की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे 225 से अधिक महिला किसानों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल को देश का पहला ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस वर्ष 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है और युवाओं को सौर परियोजनाओं के लिए सब्सिडी दी जा रही है। नालागढ़ में Oil India Limited के सहयोग से एक मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अप्रैल तक एचआरटीसी बेड़े में 300 ई-बसें शामिल होंगी और 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में बदलने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। वर्ष 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे, जो पर्यावरण संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता को दर्शाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

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