राष्ट्रीय नाट्य महाेत्सव : रिश्तों और सामाजिक व्यवहार को आकार देता नाटक व्यक्तिगत
मंडी, 05 अक्टूबर (हि.स.)। मंडी के सताहल में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार व उत्तर मध्य संस्कृतिक केंद्र प्रयागराज उत्तर प्रदेश के सहयोग से हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान व रंगमंडल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव-2026 में प्रभावशाली नाटकों का मंचन हो रहा है। महोत्सव के तीसरे दिन की संध्या पर नाट्य रंग विरासत संस्था नई दिल्ली द्वारा व्यक्तिगत नाटक मंचित किया गया प्रस्तुति‘व्यक्तिगत’ लक्ष्मीनारायण लाल द्वारा लिखित एक आधुनिक हिंदी नाटक है, जो निजी सत्य और सार्वजनिक भूमिकाओं के बीच मौजूद नाजुक और जटिल अंतराल को रेखांकित करता है। यह नाटक घरेलू जीवन की परिचित पृष्ठभूमि में रचा गया। जिसमें उन भावनात्मक तनावों और अंतर्द्वंद्वों को सामने लाता है, जो मानवीय रिश्तों, व्यक्तिगत पहचान और हमारे सामाजिक व्यवहार को आकार देते हैं।
नाटक की मुख्य भूमिका में चिन्मय दास व गौरव रावत ने बखूबी अपने किरदार को निभाया। इस नाटक की निर्देशिका वंदना विशिष्ट जो की एक जानी मानी रंग निर्देशिका है। सतोहल नाटय अकादमी की सचिव सीमा शर्मा ने बताया कि शकुंतलम थियेटर में सोमवार सांय की चेतना रंग समूह की प्रस्तुति गांधारी का मंचन होगा। जिसके लेखक जयवर्धन और निर्देशन एवं परिकल्पना आशीष श्रीवास्तव की है।
उन्होंने बताया कि गांधारी महाभारत के विराट आख्यान में उस स्त्री की अंतर्यात्रा है, जिसने पति के अंधत्व को अपना कर अपनी आंखों पर पट्टी तो बांध ली। लेकिन समय के सत्य से आंखें मूंद लेने की कीमत भी चुकाई। यह प्रस्तुति गांधारी के मौन, पीड़ा, पुत्रमोह, प्रतिशोध और अंततः आत्मबोध की कथा है। गांधारी उस अंधकार की कथा है, जो आंखों पर नहीं, चेतना पर उतरता है और उस क्षण की भी, जब युद्ध समाप्त होने के बाद मनुष्य पहली बार अपने भीतर के रणक्षेत्र को देखता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

