रंगमंच: हरिशंकर परसाई की कहानी निठल्ले की डायरी का मंचन

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रंगमंच: हरिशंकर परसाई की कहानी निठल्ले की डायरी का मंचन


मंडी, 12 जनवरी (हि.स.)। हिंदी साहित्य में हरिशंकर परसाई व्यंग्यकारों की परंपरा में एक ऐसा नाम है जो सर्वोपरि है। यदि आज के दौर में परसाई जी हमारे बीच होते, तो निस्संदेह वे एक अत्यंत लोकप्रिय, तीखे और विवादास्पद स्टैंड-अप कॉमेडियन के रूप में भी पहचाने जाते। उनकी कलम की धार इतनी पैनी है कि उनकी रचनाओं को पढ़ते हुए पाठक न केवल हंसता है, बल्कि भीतर तक झकझोर भी जाता है। उनका लेखन सरल होते हुए भी गहरे सामाजिक अर्थों को उजागर करता है।

हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं रंगमंडल प्रेक्षागृह में हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित कहानी निठल्ले की डायरी का मंचन किया गया। इस कहानी का रूपांतरण कुलदीप कुणाल द्वारा तथा निर्देशन विकास सैनी द्वारा किया गया। प्रस्तुति में परसाई जी की व्यंग्य दृष्टि के माध्यम से धर्म, समाज, राजनीति, आडंबर और भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर मीठी छुरी चलाई गई। परसाई का व्यंग्य केवल हंसी उत्पन्न करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दर्शक को यह सोचने पर विवश करता है कि क्या हमारा सामाजिक स्वरूप वास्तव में ऐसा ही है? यह व्यंग्य हमें हंसी के आवरण में छिपी गहरी और गंभीर समस्याओं से रू-बरू कराता है—या फिर उन विडंबनाओं से, जिन पर हँसने के अतिरिक्त शायद कोई और उपाय शेष नहीं रहता।

प्रस्तुति में शिवशंकर का केस एवं चमचे की दिल्ली यात्रा—इन दोनों कहानियों का एक सशक्त कोलाज प्रस्तुत किया गया, जिसे सभी कलाकारों ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंच पर साकार किया। नववर्ष के अवसर पर संस्कृति संस्थान, जो सतोहल में निरंतर अपनी रंगमंचीय गतिविधियों को सक्रिय रूप से संचालित कर रहा है, ने इस प्रस्तुति को श्रृंखला के रूप में दर्शकों तक पहुँचाया। इसी क्रम में बीते 8 जनवरी को जागृति बी.एड. कॉलेज, देवधार में भी इस नाटक का सफल मंचन किया गया। इस संपूर्ण प्रस्तुति का संयोजन रंगकर्मी सीमा शर्मा द्वारा किया गया।

नाटक में मुख्य भूमिकाएं तरुण, बिट्टू, क्षितिज, सचिन कुमार, मलय, महबूब, सचिन, वंशु एवं नीरा देवी द्वारा निभाई गईं। प्रकाश व्यवस्था का दायित्व कश्मीर सिंह ने तथा संगीत संयोजन पूजा चक्रवर्ती द्वारा कुशलतापूर्वक निभाया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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