सिरमौर के ऊपरी क्षेत्रों में प्रकृति का कहर, भारी ओलावृष्टि से फसलों और फलों को भारी नुकसान
नाहन, 30 अप्रैल (हि.स.)। जिला सिरमौर के ऊपरी इलाकों में गुरुवार को मौसम के बदले मिजाज ने किसानों और बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। दोपहर बाद अचानक हुए मौसम परिवर्तन के चलते कई क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि दर्ज की गई। इस प्राकृतिक आपदा के कारण जहाँ पूरे क्षेत्र के तापमान में भारी गिरावट आई है, वहीं खेतों में तैयार खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
जानकारी के अनुसार जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों विशेषकर हरिपुरधार, शिलाई, नोहराधार और इनके आसपास के इलाकों में कुदरत का कहर देखने को मिला। करीब आधे घंटे तक हुई तेज ओलावृष्टि ने जमीन पर सफेद चादर बिछा दी। अचानक हुई इस ओलावृष्टि से क्षेत्र के जनजीवन पर भी व्यापक असर पड़ा है।
ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान कृषि और बागवानी क्षेत्र में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि खेतों में पकने को तैयार गेहूं, जौ और मटर की फसलों को इस ओलावृष्टि ने काफी नुकसान पहुंचाया है। मटर की नकदी फसल, जो इन दिनों कटाई के करीब थी, ओलों की मार से खेतों में ही बिछ गई है।
फसलों के साथ-साथ फलों के बगीचों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। बागवानों के अनुसार, फलदार पौधों (सेब, आडू, प्लम आदि) पर इन दिनों फ्लावरिंग या छोटे फल लगने की प्रक्रिया चल रही थी, जिसे ओलावृष्टि ने बुरी तरह नष्ट कर दिया है। इससे इस साल फलों के उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
बारिश और ओलावृष्टि के बाद पूरे जिले में सर्द हवाएं चलने लगी हैं, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मौसम के इस अचानक बदले मिजाज से अप्रैल के अंत में एक बार फिर कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर

