ओपीएस की मांग को लेकर शिमला में गरजे बिजली बोर्ड कर्मचारी, हड़ताल की चेतावनी
शिमला, 02 सितंबर (हि.स.)। पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने और आउटसोर्स कर्मचारियों को बिजली बोर्ड में समायोजित करने की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के कर्मचारियों और अभियंताओं ने बुधवार को शिमला में विधानसभा के समीप चौड़ा मैदान में प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी व अभियंता संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कर्मचारी और कर्मचारी नेता पहुंचे। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की और सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की।
प्रदर्शन से पहले कर्मचारियों ने रैली निकाली। यह रैली राज्य विद्युत बोर्ड के कुमार हाउस स्थित कार्यालय तक पहुंची। इसके बाद कर्मचारी चौड़ा मैदान में एकत्र हुए। प्रदर्शन में बिजली बोर्ड के नियमित कर्मचारियों के साथ आउटसोर्स कर्मचारी और इंजीनियरिंग विंग से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हुए।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली बोर्ड के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली उनकी सबसे प्रमुख मांग है। उनका कहना है कि बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को भी दूसरे सरकारी विभागों के कर्मचारियों की तरह पुरानी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।
एचपीएसईबी एंप्लाइज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष नीतीश भारद्वाज ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बिजली बोर्ड के करीब 9 हज़ार कर्मचारियों के लिए भी पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड के कर्मचारी कोई नई सुविधा नहीं मांग रहे हैं। उनकी मांग पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की है।
उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड का गठन 1971 में हुआ था और 1972 के पेंशन नियमों के तहत कर्मचारियों को पेंशन का प्रावधान था। उनका कहना है कि जब प्रदेश के करीब डेढ़ लाख अन्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ दिया गया है, तो बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को इससे अलग क्यों रखा गया है।
नीतीश भारद्वाज ने कहा कि सरकार को बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की इस मांग पर जल्द फैसला लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुरानी पेंशन बहाल नहीं की गई और कर्मचारियों को न्याय नहीं मिला तो कर्मचारी आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे और जरूरत पड़ने पर हड़ताल का रास्ता अपनाएंगे।
यूनियन के संयोजक हीरालाल वर्मा ने कहा कि बिजली बोर्ड कर्मचारियों की कई मांगें हैं। इनमें नई भर्तियां और दूसरे कर्मचारी मुद्दे शामिल हैं, लेकिन पुरानी पेंशन की मांग सबसे प्रमुख है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड के कर्मचारी पिछले करीब ढाई से साढ़े तीन साल से पुरानी पेंशन से वंचित हैं, जबकि प्रदेश सरकार के दूसरे विभागों के कर्मचारियों को इसका लाभ मिल चुका है।
उन्होंने कहा कि 1974 में राज्यपाल की ओर से पीसीसी रूल्स लागू किए गए थे और उस समय बिजली बोर्ड के कर्मचारी भी सेवा में थे। उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में कर्मचारी शिमला पहुंचे हैं और सरकार से विधानसभा सत्र के दौरान पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा की मांग कर रहे हैं।
हीरालाल वर्मा ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो कर्मचारी लंबा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने बिजली बोर्ड में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक एक समय बिजली बोर्ड में करीब 43 हज़ार कर्मचारी थे, जो अब घटकर करीब 13 हज़ार रह गए हैं। इसके अलावा करीब 3 हज़ार कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर सेवाएं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की संख्या लगातार कम होने से बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं पर असर पड़ रहा है। उनके अनुसार बोर्ड में करीब 11 हज़ार से 12 हज़ार पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर जल्द भर्ती किए जाने की जरूरत है, जिससे बिजली बोर्ड के कामकाज को मजबूत किया जा सके और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से पुरानी पेंशन बहाल करने, आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने और बिजली बोर्ड में खाली पदों को भरने की मांग दोहराई। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

