शिमला के चौड़ा मैदान में रविवार को प्राथमिक शिक्षक संघ का महाधरना, सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया

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शिमला, 25 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ का महाधरना रविवार को शिमला के चौड़ा मैदान में होगा। महाधरने से एक दिन पहले राज्य सरकार ने संघ के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया है। अब वार्ता के नतीजे के बाद ही संघ महाधरने के आगे के स्वरूप पर अंतिम फैसला करेगा।

प्राथमिक शिक्षक संघ न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम को वापस लेने समेत 26 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। इसी सिलसिले में कांगड़ा जिले के बनखंडी से शुरू की गई न्याय पदयात्रा शिमला पहुंच गई है। संघ का कहना है कि पदयात्रा के माध्यम से सरकार का ध्यान शिक्षकों की मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।

संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि एक मार्च 2026 को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और रैली आयोजित कर उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया था। उनका कहना है कि इसके बाद भी पिछले आठ महीनों के दौरान सरकार ने वार्ता के लिए नहीं बुलाया।

हालांकि अब शनिवार शाम पांच बजे मुख्यमंत्री के साथ बैठक तय हुई है। संघ का कहना है कि इसके बावजूद रविवार को चौड़ा मैदान में महाधरना आयोजित किया जाएगा। वार्ता में यदि मांगों पर सहमति बनती है और संबंधित अधिसूचना वापस ली जाती है, तब आंदोलन के स्वरूप पर निर्णय लिया जाएगा।

रमेश शर्मा का कहना है कि पिछले आठ महीनों के दौरान उसके प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, सभी विधायकों और कांग्रेस नेताओं से मिलकर पुराने सिस्टम पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई। संघ के अनुसार जनरल हाउस की बैठक में भी एक जुलाई से सरकार के साथ वार्ता शुरू करने का आग्रह किया गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। संघ ने कहा है कि यदि उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गईं तो वर्ष 2027 तक आंदोलन जारी रहेगा और इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार तथा शिक्षा विभाग की होगी।

संघ ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2016 से छठे वेतन आयोग का लाभ, महंगाई भत्ता और एरियर लंबित हैं। उसका कहना है कि पहले हुए आंदोलन के दौरान सरकार ने कुछ मांगें स्वीकार की थीं, लेकिन उनका पूरा क्रियान्वयन नहीं हुआ। संघ के अनुसार, उसके आठ पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है।

संघ ने कहा कि उसका आंदोलन गांधीवादी तरीके से चलाया जा रहा है। इसी कारण न्याय पदयात्रा गर्मी की छुट्टियों के दौरान निकाली गई, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। संघ का आरोप है कि वर्ष 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह के समय शिक्षकों को जो व्यवस्था दी गई थी, उसे वर्तमान व्यवस्था के माध्यम से समाप्त किया जा रहा है। संघ ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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