पहले महीनें में ही हांफ गई शराब का ठेका चलाने वाली तेलंगाना की कंपनी : जयराम ठाकुर
मंडी, 02 जून (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि व्यवस्था परिवर्तन का राग अलापने वाली सुक्खू सरकार अपने दावे के अनुरूप आबकारी राजस्व में वृद्धि नहीं कर पाई है। आलम ये है कि जिन कंपनियों को शराब के यूनिट दिए गए हैं वो लाइसेंस फीस तक नहीं जमा कर पाये और विभाग को इनके ठेके सील करने पड़ रहे हैं।
मंडी से जारी प्रेस बयान में उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कुल्लू-लाहौल और पांगी में शराब का ठेका चलाने का काम कांग्रेस शासित तेलंगाना की कंपनी को दिया गया था, लेकिन नियमों में फेर-बदल करके हिमाचल के सर्वाधिक पर्यटकों की आमद वाले कुल्लू-लाहौल-पांगी क्षेत्र के ठेकों को एक ही यूनिट के रूप में नीलाम किया गया और बेस प्राइस से मात्र एक लाख रुपए अधिक की बोली लगाकर एपीटको ने यह नीलामी अपने नाम की थी, मगर यह कंपनी पहले महीने में ही हांफ गई है और मई महीने की 15 करोड़ रुपए की लाइसेंस फीस न चुकाने के कारण प्रशासन द्वारा शराब के ठेके सील कर दिए गए हैं, जिससे साफ है कि जब टूरिस्ट सीजन के चरम पर यह स्थिति है तो आने वाले समय में कितनी भयावह स्थिति बनेगी।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इसके पहले भी हिमाचल प्रदेश में नगर निगम समेत विभिन्न निगमों और बोर्ड्स से मुख्यमंत्री ने शराब बिकवाकर उनका करोड़ों का घाटा करवाया है और अब वे आबकारी विभाग को अपने व्यवस्था परिवर्तन की प्रयोगशाला बनाकर प्रदेश के राजस्व को भारी चपत लगा रहे हैं क्योंकि जमीनी हकीकत और डॉक्युमेंटेड आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार राजस्व बढ़ाने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सत्ता में आते ही विधानसभा से लेकर सार्वजनिक मंचों से बड़े-बड़े दावे किए थे कि उनकी सरकार ने पहले ही वर्ष में आबकारी राजस्व में 40 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री के बाकी दावों की तरह यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। सुक्खू सरकार के पहले साल के बाद आबकारी राजस्व का आंकड़ा दहाई की वृद्धि भी हासिल नहीं कर पाया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार सुक्खू सरकार के कार्यकाल के दूसरे साल 2024-25 में आबकारी राजस्व महज 0.22 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2025-26 में 7.2 प्रतिशत वृद्धि हुई। वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में भी मात्र 9.74 प्रतिशत वृद्धि ही आंकी गई है। जबकि पूर्व की भाजपा सरकार के कार्यकाल में कोविड जैसी वैश्विक महामारी और देशव्यापी आर्थिक मंदी के बावजूद आबकारी राजस्व में वर्ष 2018-19 में लगभग 13.04 प्रतिशत वृद्धि, वर्ष 2019-20 में 12.1 प्रतिशत , वर्ष 2021-22 में 23.8% और वर्ष 2022-23 में 11.9 प्रतिशत वृद्धि हुई। लेकिन वर्तमान सुक्खू सरकार के गलत फैसलों, चहेती बाहरी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीतियों और प्रशासनिक नाकामी के कारण आज प्रदेश का खजाना खाली हो रहा है और राजस्व बढ़ने के बजाय सरकारी राजस्व को निरंतर भारी आर्थिक चपत लग रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

