हवा में चल रही सरकार, धरातल पर विकास शून्य् : जयराम ठाकुर

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हवा में चल रही सरकार, धरातल पर विकास शून्य् : जयराम ठाकुर


मंडी, 30 अप्रैल (हि.स.)। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि वर्तमान प्रदेश सरकार केवल मंचों से भाषणबाजी और बड़ी-बड़ी बातें करने तक सीमित रह गई है। जबकि धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत और निराशाजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर रौद्र रूप दिखाकर अधिकारियों की क्लास लगाना केवल एक राजनीतिक स्टंट और फोटो-ऑप है ताकि अपनी विफलताओं को छिपाया जा सके। क्योंकि यदि सरकार वास्तव में गंभीर होती तो समय रहते तकनीकी खामियों और निर्माण की धीमी रफ्तार को दुरुस्त किया जाता, न कि प्रोजेक्ट की डेडलाइन के इतने करीब आकर काम रुकवाया जाता।

जयराम ठाकुर वीरवार को मंडी जिला के सराज विधानसभा त्स्थित बग़्स्याड के गांव ढयास से संबंध रखने वाले भाजपा कार्यकर्ता नरेंद्र वर्मा की माता के दुखद निधन के उपरांत उनके घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना।

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 225 करोड़ रुपए की जनता की गाढ़ी कमाई से बन रहे कांगड़ा ढगवार मिलक प्रोसेसिंग प्लांट के डिजाइन में बदलाव और गुणवत्ता से समझौता होना प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ है । यह सिद्ध करता है कि सुक्खू सरकार में निर्णय कहीं और लिए जा रहे हैं । जबकि मुख्यमंत्री केवल मंचों पर घोषणावीर बने हुए हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने दिनों तक यह काम किसके भरोसे चल रहा था और क्या मुख्यमंत्री को इस बात का अहसास नहीं है कि उनकी इस हवा-हवाई कार्यप्रणाली के कारण प्रदेश के विकास कार्य बुरी तरह ठप पड़ चुके हैं।

जयराम ठाकुर ने मांग की कि केवल अधिकारियों को फटकारने से काम नहीं चलेगा। बल्कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे तो तकनीक बदलने का दुस्साहस किसने किया। इतने बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी में इतनी बड़ी लापरवाही के लिए कौन जवाबदेह है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब कांग्रेस सरकार के इन विरोधाभासी बयानों और दिखावे की राजनीति को समझ चुकी है, जहां मुख्यमंत्री कहते कुछ और हैं, फाइलों पर कुछ और होता है और धरातल पर काम की रफ्तार शून्य रहती है, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ने से राजकोष पर भी अनावश्यक बोझ पड़ रहा है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने पहले ही दिन मुख्यमंत्री को आगाह किया था कि विश्वविद्यालय की बेशकीमती जमीन बेचने या उसे व्यावसायिक उपयोग के लिए डायवर्ट करने का फैसला कानून की कसौटी पर एक दिन भी नहीं टिकेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश के संसाधनों को अपने मित्रों पर लुटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें कोई भी उनका साथ नहीं देगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनभावना और नियमों के विरुद्ध फैसले लेकर सरकार न केवल प्रदेश के विकास की संभावनाओं पर विराम लगा रही है, बल्कि फिजूल की कानूनी लड़ाइयों में प्रदेश की ऊर्जा और संसाधन भी बर्बाद कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि वे अपनी नीतियों और निर्णयों में हिमाचल हित, जनभावना और स्थापित नियमों का सम्मान करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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