मंडी जिला कांग्रेस की कमान पहली बार महिला को, चंपा ठाकुर बनी अध्यक्ष

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मंडी जिला कांग्रेस की कमान पहली बार महिला को, चंपा ठाकुर बनी अध्यक्ष


मंडी, 03 जनवरी (हि.स.)। मंडी जिला कांग्रेस को लगभग 14 महीने बाद अध्यक्ष मिल गया है। कांग्रेस के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि मंडी जिला कांग्रेस की कमान एक महिला को सौंपी गई है। चंपा ठाकुर को राजनीति एक तरह से विरासत में मिली है क्योंकि दं्रग क्षेत्र से आठ बार विधायक, कई बार कैबिनेट मंत्री व दो बार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे कौल सिंह ठाकुर की वह बेटी हैं और उनके आशीर्वाद व मार्गदर्शन में ही राजनीति में आई हैं।

चंपा ठाकुर ने पार्टी में कई बड़े चेहरों को पछाड़ कर यह पद पाया है। बेबाक टिप्पणियों के लिए चंपा ठाकुर को जाना जाता है। उसने अपनी मुख्य राजनीति जिला परिषद से शुरू की थी। जिला परिषद की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं तथा वर्तमान में भी वह जिला परिषद की सदस्य है। वह लगातार दो बार मंडी सदर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ कर पंडित सुख राम के परिवार यानी अनिल शर्मा को चुनौती दे चुकी हैं। भले ही वह दोनों ही बार चुनाव जीत नहीं पाई मगर मुकाबला उन्होंने खूब किया है।

पंडित सुख राम के गढ़ में उनको चुनौती देना आसान नहीं मगर अब तेज तर्रार छवि के चलते कांग्रेस में उसका सिक्का खूब चलता आ रहा है। वह सरकारी समारोहों में भी खूब शिरक्त कर रही है। मंडी जिले के दस विधानसभा क्षेत्रों में से 9 पर भाजपा के विधायक हैं। सांसद भी यहां से भाजपा का है। ऐसे में नई जिला कांग्रेस अध्यक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती तो मंडी जिले जो प्रदेश का कांगड़ा के बाद दूसरा बड़ा जिला है, राजनीतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है, में कांग्रेस को खड़ा करना है। वर्तमान में भी जिला कांग्रेस में खेमबाजी कम नहीं है। एक धड़ा वीरभद्र सिंह के समर्थकों का है जबकि दूसरा वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का समर्थक है। बीच में कौल समर्थक भी अलग से अपनी एक आस्था रखते हैं। इन सबको साथ लेकर चलना भी चंपा ठाकुर के लिए एक चुनौती रहेगा। पंचायती राज संस्थानों के चुनाव सिर पर हैं तो दो साल बाद विधानसभा चुनाव भी होने हैं । कभी मंडी जिला जो कांग्रेस का गढ़ रहा है, मगर वर्तमान में हालात अलग है। यहां फिर से कांग्रेस संगठन खड़ा करना कोई आसान काम नहीं है।

मंडी जिला पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का गढ़ बन चुका है और वह अपनी पैठ भी साबित कर चुके हैं। ऐसे में चंपा ठाकुर के लिए अब भाजपा का गढ़ बन चुके मंडी जिले में कांग्रेस संगठन जो 14 महीने से लगभग ध्वस्त पड़ा है को फिर से खड़ा करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। राजनीति में में लगभग 20 साल के अनुभव का लाभ उठाकर चंपा ठाकुर अब इन चुनौतियों से कितना पार पा सकेंगी यह आने वाले समय ही बताएगा। सबसे पहले तो उसे पूरे जिला में संगठन को खड़ा करना होगा, जातीय, क्षेत्रीय व गुटीय संतुलन साध कर कार्यकारिणी का गठन करना होगा तभी इन चुनौतियों से पार पाया जा सकेगा। बहरहाल प्रदेश में दस जिलों के अध्यक्ष बना देने से कांग्रेस संगठन में हलचल बढ़ गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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