हिमाचल में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी करना पड़ रहा संघर्ष : राकेश जम्वाल

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हिमाचल में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी करना पड़ रहा संघर्ष : राकेश जम्वाल


मंडी, 11 अक्टूबर (हि.स.)। मंडी जिला के सुंदरनगर विधानसभा क्षेत्र के निहरी में आज आस्था हॉस्पिटल द्वारा ग्राम पंचायत मरहड़ा बदैहण में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। आस्था हॉस्पिटल के एमडी डॉ. अरुण चंदेल और उनकी टीम के सहयोग से आयोजित इस शिविर में क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध करवाई गई।

सुंदरनगर विधायक एवं भाजपा नेता राकेश जम्वाल ने इस पहल की सराहना करते हुए डॉ. अरुण चंदेल और उनकी पूरी टीम के प्रयासों की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। अनेक क्षेत्रों में लोगों को समय पर उपचार, पर्याप्त चिकित्सक और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चरमराई हुई है और स्वास्थ्य मंत्री को इन समस्याओं का जवाब देना चाहिए। जब मरीजों को बेहतर उपचार के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर होना पड़ता है, तो इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ता है।

पहाड़ी प्रदेश होने के कारण हिमाचल के दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत होना और भी आवश्यक है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी लंबी दूरी तय न करनी पड़े। जम्वाल ने कहा कि मात्र मशीनें खरीद लेना ही उपचार नहीं है। अस्पतालों में आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाना तभी सार्थक है, जब उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी और मरीजों का उपचार करने के लिए पर्याप्त डॉक्टर, नर्सें तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद हों। यदि मशीनें अस्पतालों में रखी हों, लेकिन उनका संचालन करने के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध न हों, तो आम जनता को उनका लाभ कैसे मिलेगा? सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा केवल उपकरणों और भवनों के आधार पर नहीं, बल्कि मरीजों को मिल रहे वास्तविक उपचार के आधार पर करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर सवाल उठते हैं। ग्लव्स और पैरासिटामोल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी यदि मरीजों के तीमारदारों को अस्पताल के बाहर जाना पड़े, तो यह व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है। सरकारी अस्पतालों में उपचार के साथ जरूरी दवाइयां और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकारी अस्पतालों में राहत मिलनी चाहिए, न कि दवाइयों और जरूरी सामान के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़े।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनेक स्थानों पर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी को दूर करना समय की मांग है। सरकार को रिक्त पद भरने, आवश्यक दवाइयों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध मशीनों का प्रभावी उपयोग करने और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए, डॉक्टरों एवं अन्य कर्मचारियों के रिक्त पद भरे जाएं, अस्पतालों में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुचारु रूप से चलाया जाए। राकेश जम्वाल ने कहा कि प्रदेश की जनता को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि अस्पतालों में डॉक्टर, जरूरी दवाइयां और समय पर उपचार चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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