वीबी–जी राम जी अधिनियम पर कांग्रेस फैला रही भ्रम : सुरेश कश्यप
सोलन, 11 जनवरी (हि.स.)। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने केंद्र सरकार द्वारा पारित वीबी–जी राम जी विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 को लेकर कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने रविवार को कहा कि कांग्रेस मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर गलत जानकारी देकर इस कानून का विरोध कर रही है, जिससे उसकी ग्रामीण और विकास विरोधी सोच सामने आती है।
सुरेश कश्यप ने कहा कि आज़ादी के बाद गरीबों और मजदूरों को रोजगार देने के लिए कई योजनाएं शुरू हुईं। काम के बदले रोजगार, जवाहर रोजगार योजना और बाद में नरेगा व मनरेगा लागू की गईं। उन्होंने कहा कि 2005 में शुरू हुई नरेगा ने शुरुआती दौर में लाभ जरूर दिया, लेकिन समय के साथ इसमें फर्जी मस्टर रोल, फर्जी जॉब कार्ड, भुगतान में देरी, ठेकेदारी प्रथा और स्थायी परिसंपत्तियों के अभाव जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं, जिससे रोजगार के साथ विकास का उद्देश्य कमजोर हो गया।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल 2006 से 2014 के दौरान 1660 करोड़ श्रम-दिवस सृजित हुए और करीब 2.13 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं एनडीए सरकार के समय 2014 से 2025 के बीच 3210 करोड़ श्रम-दिवस सृजित हुए और 8.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए। पूर्ण किए गए कार्यों की संख्या यूपीए के समय 153 लाख रही, जबकि एनडीए काल में यह बढ़कर 862 लाख तक पहुंच गई। व्यक्तिगत परिसंपत्तियों का निर्माण यूपीए में 17.6 प्रतिशत था, जो एनडीए में बढ़कर करीब 63 प्रतिशत हो गया। आधार सीडिंग और सीधा लाभ अंतरण लागू होने से मजदूरी सीधे मजदूरों के खातों में पहुंची।
सांसद ने कहा कि वीबी–जी राम जी अधिनियम हिमाचल जैसे पहाड़ी और विशेष श्रेणी राज्यों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। पहले जहां केंद्र का अंशदान 75 प्रतिशत था, अब इसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें, जल संरक्षण कार्य, ग्रामीण अवसंरचना और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण तेजी से होगा।
उन्होंने कांग्रेस के इस दावे को गलत बताया कि रोजगार की गारंटी खत्म कर दी गई है। सुरेश कश्यप ने कहा कि सच्चाई यह है कि 100 दिन की रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है और यह कानूनी गारंटी है। योजना पहले की तरह मांग आधारित रहेगी और यदि समय पर काम या भुगतान नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान भी जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि नए कानून में पारदर्शिता पर खास जोर दिया गया है। जियो-टैगिंग, जीपीएस मैपिंग, डिजिटल ट्रैकिंग और एआई आधारित सोशल ऑडिट को अनिवार्य किया गया है, जिससे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। योजनाओं का चयन और निगरानी ग्राम सभा से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक समन्वय के साथ होगी, जिससे काम स्थायी और परिणाम देने वाले होंगे।
सुरेश कश्यप ने बताया कि प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, ताकि प्रशिक्षण, स्किलिंग और तकनीक का बेहतर इस्तेमाल हो सके। कृषि मौसम के दौरान 60 दिन के विराम का निर्णय राज्य सरकारें लेंगी और इससे 125 दिन की मजदूरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह लचीलापन हिमाचल जैसे भौगोलिक रूप से विविध राज्यों के हित में है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संदीप शर्मा

