हिमाचल में सड़कों की मरम्मत के लिए दो नई आधुनिक तकनीकों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू
शिमला, 13 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में खराब सड़कों की मरम्मत और उनकी दीर्घकालीन मजबूती सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने दो आधुनिक तकनीकों का पायलट प्रयोग शुरू किया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मंगलवार को शिमला में बताया कि राज्य की क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए चुनी गई तकनीकें हैं ‘सीमेंट ग्राउटेड बिटुमिनस मैकाडम (सीजीबीएम)’ और ‘स्टेबलाइज्ड बेस लेयर तकनीक’। शुरुआत में इन तकनीकों का प्रयोग शोघीदृमेहली सड़क पर किया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि लोक निर्माण विभाग राज्य में लगभग 35,000 किलोमीटर सड़कों का रखरखाव करता है। खराब मौसम और जलभराव के कारण राज्य की लगभग 20 प्रतिशत सड़कें बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे मरम्मत पर लगातार खर्च बढ़ता है। इन नई तकनीकों से सड़कें अधिक मजबूत बनेंगी, भारी यातायात के लिए सक्षम होंगी और पानी से होने वाले नुकसान से भी बेहतर बचाव होगा।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इन तकनीकों से बनी सड़कें लगभग 10 साल तक खराब नहीं होंगी, जिससे रखरखाव का खर्च कम होगा और लोगों को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि ये तकनीकें पहले से ही देश के कई राज्यों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), अन्य सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा रही हैं।
मंत्री ने कहा कि केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) के सहयोग से शोघीदृमेहली सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे एक समिति गठित करें, जो वर्ष 2026–27 की वार्षिक रखरखाव योजना के तहत उन सड़कों की पहचान करेगी, जहां इन तकनीकों का उपयोग किया जा सके।
इस अवसर पर नई तकनीकों पर आधारित सड़क कार्य की प्रगति पर एक प्रस्तुति भी दी गई। मंत्री ने कहा कि यह प्रयास राज्य की सड़कों को अधिक टिकाऊ बनाने और हर मौसम में संपर्क सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

