हिमाचल में पशु मित्र भर्ती के नियम बदले, अब फिजिकल टेस्ट अनिवार्य

WhatsApp Channel Join Now

शिमला, 13 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पशु मित्र भर्ती को लेकर सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। पशुपालन विभाग ने पशु मित्र नीति-2025 में संशोधन करते हुए भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी फिजिकल टेस्ट को अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में विभाग ने अधिसूचना जारी कर नई व्यवस्था लागू कर दी है।

नई व्यवस्था के अनुसार अब पशु मित्र बनने के लिए उम्मीदवारों को शारीरिक परीक्षा पास करनी होगी। पुरुष उम्मीदवारों को 30 मिनट के भीतर पांच किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी, जबकि महिला उम्मीदवारों को 10 मिनट में 1500 मीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। यह पूरी परीक्षा विभाग द्वारा तय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत करवाई जाएगी।

दरअसल कुछ समय पहले पशु मित्र भर्ती के दौरान महिलाओं से बोरी उठाकर दौड़ लगाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस दौरान कई महिलाएं दौड़ते हुए गिरती भी दिखाई दी थीं। इस घटना के बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद पशुपालन विभाग ने भर्ती प्रक्रिया पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी। अब विभाग ने नीति में संशोधन करते हुए नए नियम तय किए हैं।

पशुपालन विभाग का कहना है कि पशु मित्र ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें पशु चिकित्सालयों और पशुपालन फार्मों में कई तरह के काम करने पड़ते हैं, जिनके लिए शारीरिक रूप से सक्षम होना जरूरी है। इसी वजह से अब चयन प्रक्रिया में शारीरिक क्षमता की जांच को शामिल किया गया है।

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन उम्मीदवारों ने पहले की व्यवस्था के तहत शारीरिक परीक्षा पास कर ली थी, उन्हें दोबारा परीक्षा नहीं देनी होगी। ऐसे उम्मीदवारों को सीधे अगली काउंसलिंग या चयन प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा। वहीं जो उम्मीदवार पहले शारीरिक परीक्षा पास नहीं कर पाए थे, उन्हें नई व्यवस्था के अनुसार फिर से परीक्षा देने का मौका मिलेगा।

सरकार ने आवेदन की कट-ऑफ तिथि में भी बदलाव किया है। अब नियम के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में दर्ज आवेदक या उसके परिवार के नाम पशुधन होना चाहिए। इसके साथ ही यह पशुधन भारत पशुधन पोर्टल पर 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले पंजीकृत होना जरूरी होगा।

विभाग के अनुसार पशु मित्रों को अपने काम के दौरान कई ऐसे कार्य करने पड़ते हैं जिनमें शारीरिक ताकत और सहनशक्ति की जरूरत होती है। उदाहरण के तौर पर उन्हें तरल नाइट्रोजन से भरे कंटेनरों को उठाकर ले जाना पड़ता है। इन कंटेनरों की क्षमता 11 लीटर से लेकर 35 लीटर तक हो सकती है। इसके अलावा उन्हें गाय, भैंस, घोड़े, खच्चर, भेड़ और बकरियों जैसे पशुओं को संभालना भी पड़ता है। कई बार उपचार के दौरान लगभग 25 किलोग्राम तक वजन उठाना पड़ता है।

इसके साथ ही गर्भावस्था पोषण योजना के तहत 50 किलोग्राम तक के पशु आहार के बैग को गोदाम से उठाकर लाभार्थियों तक पहुंचाने का काम भी पशु मित्रों को करना पड़ता है। चरागाहों में भेड़ों के बच्चों को उठाकर ले जाना या उन्हें संभालना भी उनके काम का हिस्सा होता है। इन्हीं जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक क्षमता की परीक्षा को जरूरी माना गया है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story