शास्त्री भर्ती में विसंगतियां दूर करे प्रदेश सरकार : कमलकांत गौतम

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शिमला, 04 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में शास्त्री की बैच-वाइज भर्ती को लेकर विवाद के बीच हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष कमलकांत गौतम ने सोमवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में कहा है कि मौजूदा प्रक्रिया से न केवल हजारों पात्र शास्त्री अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है, बल्कि इससे संस्कृत शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।

कमलकांत गौतम के मुताबिक शास्त्री एक विशेष डिग्री है, जिसमें विद्यार्थी पारंपरिक शास्त्रों का गहन अध्ययन करता है, जबकि सामान्य बी.ए. में केवल एक विषय के रूप में संस्कृत पढ़ी जाती है। उनका कहना है कि ऐसे में बी.ए. में संस्कृत पढ़ने वाले अभ्यर्थियों को शास्त्री पद के लिए पात्र मानना शिक्षा के स्तर से समझौता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह गणित का एक विषय पढ़ने वाला छात्र टीजीटी (नॉन-मेडिकल) नहीं बन सकता, उसी तरह एक विषय संस्कृत पढ़ने वाला छात्र शास्त्री पद का पात्र नहीं होना चाहिए।

परिषद ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके विपरीत स्थिति दिखाई दे रही है। प्रदेश में कई राजकीय संस्कृत महाविद्यालय और अन्य संस्थान चल रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्र पारंपरिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में यदि सामान्य स्नातक को प्राथमिकता दी जाती है, तो इन संस्थानों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है और छात्र पारंपरिक शिक्षा से दूर हो सकते हैं।

बैच-वाइज भर्ती को लेकर परिषद ने कहा कि वर्षों से इंतजार कर रहे शास्त्री अभ्यर्थियों को बी.एड. के आधार पर बाहर करना उचित नहीं है। परिषद का कहना है कि पहले शास्त्री पद के लिए बी.एड. अनिवार्य नहीं थी, इसलिए पुराने अभ्यर्थियों के लिए शास्त्री के बैच को ही आधार माना जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शास्त्री उपाधि धारकों के लिए बी.एड. में विशेष कोटा नहीं है, जो एक बड़ी कमी है।

परिषद ने सरकार से मांग की है कि भर्ती से जुड़े नियमों में आवश्यक सुधार किए जाएं, पात्रता को स्पष्ट किया जाए और शास्त्री उपाधि धारकों को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा परिषद ने अलग से समिति बनाकर इस पूरे मामले की समीक्षा करने की मांग भी की है, ताकि सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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