दुर्गम क्षेत्र की चुनौती को महिला सेक्टर आफिसर रेवती सैनी ने बनाया एक अवसर

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दुर्गम क्षेत्र की चुनौती को महिला सेक्टर आफिसर रेवती सैनी ने बनाया एक अवसर


दुर्गम क्षेत्र की चुनौती को महिला सेक्टर आफिसर रेवती सैनी ने बनाया एक अवसर


मंडी, 29 मई (हि.स.)। पंचायतीराज चुनावों में जहां विभिन्न पदों के लिए चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने पसीना बहाया। दूसरी ओर मंडी जिला की रेवती सैनी पंचायतीराज चुनावों में ऐसी पहली महिला सेक्टर आफिसर बन गई है जिसने दुर्गम क्षेत्र की चुनौती को अवसर में बदला है। तपती गर्मी, धूल भरी सड़कों, उबड़-खाबड़ रास्तों और सात से नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित मतदान केंद्रों तक पहुंचकर चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करवाने वाली मंडी की इस महिला सेक्टर आफिसर के हौंसले ने नया इतिहास रचा है। वहीं पर महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम की है।

जिला भाषा अधिकारी मंडी के पद पर तैनात रेवती सैनी की सदर ब्लॉक के सबसे दुर्गम सेक्टर कटौला में बतौर सेक्टर आफिसर पहली बार चुनावी डयूटी लगी। कमांद के उहल दरिया से टिहरी व पराशर की पहाड़ियों से सेगली, टिहरी, कटौला, सकरयार, कमांद, नवलाय और रियागड़ी तक फैले सात पंचायतों के इस दुर्गम क्षेत्र में 43 पोलिंग बूथ शामिल है। सैंकड़ों किलोमीटर तक नदी, नालों, घाटियों, और जंगलों से घिरे इस क्षेत्र को सदर ब्लॉक का सबसे दुर्गम और पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है। जहां आमतौर पर चुनावों के दौरान बतौर सेक्टर आफिसर पुरूष अधिकारियों की ही डयूटी लगाई जाती है।

क्योंकि इस दौरान सेक्टर आफिसर को हर पोलिंग बूथ पर जाकर हर व्यवस्था सुनिश्चित करवानी पड़ती है।

इसके अलावा पोलिंग पार्टिंयों के पहुंचने, पोलिंग शुरू करवाने से लेकर मतपेटियों को मतगणना केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था और पोलिंग बूथों में सामान कम होने पर आपूर्ति करना रहता है। रेवती सैनी ने सेक्टर आफिसर की इस चुनावी डयूटी की चुनौती को अपने लिए एक अवसर के रूप में देखा। उनका मानना है कि ऐसा कोई काम नहीं है जो महिलाएं नहीं कर सकती है, हर वो काम जो कोई दूसरा इंसान कर सकता है, वो मैं भी कर सकती हूं। मुझे इस नई जिम्मेदारी को निभाते हुए रोमांच के साथ आंनद भी आ रहा है।

उन्होंने बताया कि बीते एक माह से वह पंचायत चुनाव की प्रक्रिया से जुड़ी है ,जिससे नये अनुभव और नई चीजें सीखने को मिल रही है।उन्होंने बताया कि पोलिंग के प्रथम चरण के मतदान सुबह सात बजे शुरू करवाने के लिए घर से सुबह पांच बजे निकलना पड़ता है । हालांकि, यह क्षेत्र बहुत ही दुर्गम और पिछड़ा हुआ है। खासकर सकरयार, अरनेहड़, सोलंग, कुंदख, नेरी, निशु, बड़ौन, टिहरी, लांझणू, बोडनधार, दरलोग आदि सात से नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित हैं। जहां तक पहुंचने के लिए धूल भरी सड़कों, रास्तों और पगडंडियों में मीलों सफर करना पड़ता है। यहां के लोगों का जीवन भी संघर्षपूर्ण और जीवट है। चुनावी डयूटी के दौरान यह सब करीब से देखने और समझने का अवसर मिला है। हालांकि, मतदान के दौरान उन्हें अपने घर से सुबह पांच बजे निकल कर सात बजे बूथ पर पहुंचकर पोलिंग शुरू करवाई। इसके पश्चात मतदान के बाद बीडीसी और जिला परिषद के उम्मीदवारों की पेटियों को एकत्रित कर मंडी स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने नौ से दस बजे का समय लग जाता था, और घर पहुंचने तक बारह बज जाते थे।

उन्होंने बताया कि इससे उन्हें नए अनुभव और सीखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि मुझे बहुत प्रसन्नता है कि मुझे इस योग्य समझा,मुझे चुनौतीपूर्ण कार्य करना पसंद है। जिसके लिए प्रशासन की आभारी हूं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को इस तरह की चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए, अपितु उनका डटकर सामना करना चाहिए। भविष्य में भी वह इस तरह की डयूटी के लिए तैयार हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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