मध्य प्रदेश की तर्ज पर पूरे देश में पत्रकारों को मिले पेंशन एनयूजे आई की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक में उठाई मांग
मंडी, 07 अक्टूबर (हि.स.)। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक अयोध्या के हनुमान बाग आश्रम में संपन्न हुई। देश के 22 राज्यों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में सहभागिता की। बैठक से लौट कर जानकारी देते हुए हिमाचल प्रदेश यूनियन आफ जर्नलिस्ट के अध्यक्ष बीरबल शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ बलबीर सिंह ठाकुर, महासचिव सुरेंद्र शर्मा, राष्ट्रीय सचिव अदीप सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बैठक में पत्रकारों को सबसे अधिक रोजगार देने वाले प्रिंट मीडिया के प्रति उदारता बरतने, लोकतंत्र में मीडिया आज की अपनी भूमिका की समीक्षा करे, वेज बोर्ड का गठन, पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने, मीडिया आयोग व मीडिया काउंसिल बनाने सहित पत्रकार हित के अनेक प्रस्ताव पारित किए गए। मध्य प्रदेश की तर्ज पर 60 साल से उपर के सभी पत्रकारों को 20 हजार रूपए प्रति मास पेंशन देने की मांग भी केंद्र व राज्यों से उठाई गई।
बैठक का शुभारंभ करते हुए उतर प्रदेश सरकार में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा लोकतंत्र को बचाने में पत्रकारों की बड़ी भूमिका है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता की तुलना में राजनीति उतनी विश्वसनीय नहीं है। उन्होंने योगी सरकार के कामकाज का विस्तार से ब्योरा प्रस्तुत किया। एनयूजे-आई अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने कहा कि आज भी जनता में सबसे विश्वसनीय स्तंभ मीडिया को ही माना जाता है। जद एस के प्रदेश अध्यक्ष ओंकार सिंह ने समाजवाद और पत्रकारिता का तालमेल बताते हुए जागरूक किया।
नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने मीडिया की समाज को जागरूक करने की भूमिका की सराहना करते हुए अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा किए कार्यों से यहां के कायाकल्प को विस्तार से रखा। आभार महासचिव त्रियुग नारायण तिवारी ने माना।
एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि आज भी यह कहा जा सकता है कि मीडिया ही वास्तव में लोकतंत्र का रक्षक है। वह समाज को जागरूक करता है और सरकार को राह दिखाता है। सच से अवगत कराता है। उसकी समाज में आज भी सबसे अधिक विश्वसनीयता है। वहीं उन्होंने जोड़ा कि इतनी विश्वसनीयता राजनीति की नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डिजिटल व सोशल मीडिया के प्रभाव से समय-समय पर पत्रकारिता प्रभावित होती रही है। ऐसे में प्रिंट मीडिया कि समाज के प्रति जिम्मेदारी अधिक बढ़ी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

