रामपुर के खनेरी नर्सिंग हॉस्टल में 19 नहीं, सिर्फ 2 छात्राएं टीबी संक्रमित : नेशनल हैल्थ मिशन

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शिमला, 03 मई (हि.स.)। शिमला जिला के रामपुर स्थित महात्मा गांधी मेडिकल सर्विसेज कॉम्प्लेक्स (एमजीएमएससी) खनेरी के नर्सिंग हॉस्टल में टीबी के मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही खबरों को नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने भ्रामक बताया है। मिशन की तरफ से रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि 19 छात्राओं के टीबी से संक्रमित होने का दावा पूरी तरह गलत है, जबकि वास्तविकता यह है कि केवल 2 छात्राएं टीबी पॉजिटिव पाई गई हैं और उनका इलाज चल रहा है।

नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार पहला मामला 9 जुलाई 2025 को सामने आया था, जब एक छात्रा में टीबी की पुष्टि हुई। उसी दिन उसका इलाज शुरू कर दिया गया और उसके संपर्क में आई 13 छात्राओं की पहचान कर उन्हें एहतियात के तौर पर ‘टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी’ दी गई। इसके बाद 9 दिसंबर 2025 को दूसरी छात्रा में टीबी की पुष्टि हुई, जिसका भी तुरंत इलाज शुरू किया गया। उसके संपर्क में आई 3 अन्य छात्राओं को भी प्रिवेंटिव थेरेपी दी गई।

एनएचएम ने स्पष्ट किया है कि कुल 16 छात्राएं केवल ‘क्लोज कॉन्टैक्ट’ हैं, यानी वे संक्रमित मरीजों के संपर्क में आई थीं, लेकिन उनमें टीबी की बीमारी नहीं पाई गई है। इन्हें भविष्य में संक्रमण से बचाने के लिए भारत सरकार की गाइडलाइंस के तहत दवाएं दी जा रही हैं। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि नर्सिंग हॉस्टल में मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (एमडीआर-टीबी) का कोई भी मामला सामने नहीं आया है, जबकि सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाहें भी फैलाई जा रही थीं।

एनएचएम के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों संक्रमित छात्राओं को केंद्र सरकार की ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत सीधे बैंक खाते में आर्थिक सहायता दी जा रही है और ‘निक्षय मित्र’ के माध्यम से पोषण किट भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि इलाज के दौरान उन्हें पर्याप्त पोषण मिल सके।

एनएचएम ने यह भी कहा कि जैसे ही मामले सामने आए, तुरंत इलाज शुरू कर दिया गया और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया। साथ ही संपर्क में आए लोगों की समय पर जांच और उन्हें प्रिवेंटिव थेरेपी देकर संक्रमण को फैलने से रोकने के प्रयास किए गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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