नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने किया बहुविषयक और मूल्य-आधारित शिक्षा का विकास: प्रो. अवस्थी

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नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने किया बहुविषयक और मूल्य-आधारित शिक्षा का विकास: प्रो. अवस्थी


मंडी, 28 मार्च (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में इंडियन नॉलेज सिस्टम के तहत राष्ट्रीय सम्मेलन तथा भारत बौद्धिक परीक्षा के टॉपर्स के सम्मान

समारोह का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) ललित कुमार अवस्थी कुलपति, एसपीयू मंडी द्वारा की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) के. सी. शर्मा, अध्यक्ष, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष वीबीयूएसएस तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) लक्ष्मीधर बेहेरा, निदेशक, आईआईटी मंडी उपस्थित रहे।

इस सम्मेलन के संयोजक डॉ. सनील ठाकुर, डीन प्लानिंग एवं डेवलपमेंट तथा प्रो. (डॉ.) सुरेंद्र कुमार शर्मा, एचपी विश्वविद्यालय शिमला एवं अध्यक्ष वीबीयूएसएस नॉर्थ ज़ोन रहे।

इस अवसर पर डॉ. सुरेंद्र श्रेष्ठ, रजिस्ट्रार, नेपाल ओपन यूनिवर्सिटी, नेपाल भी उपस्थित रहे। संयोजकों ने सभी अतिथियों और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।

इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। भारत बौद्धिक परीक्षा के टॉपर्स और पुरस्कार विजेताओं को भी

इस अवसर पर सम्मानित किया गया। प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने अपने संबोधन में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि

नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों ने बहुविषयक और मूल्य-आधारित शिक्षा का विकास किया। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, भाषा, शासन, नैतिकता और पर्यावरण जैसे कई क्षेत्रों का समावेश है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नीति पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा को जोड़ने का काम करती है।

उन्होंने बताया कि एसपीयू ने आईकेएस केंद्र स्थापित करने, स्थानीय ज्ञान पर शोध को बढ़ावा देने और हिमालयी क्षेत्रों में फील्ड स्टडी को प्रोत्साहित करने जैसे कदम उठाए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों को धर्म, अहिंसा और समाज कल्याण जैसे मूल्यों के साथ जोड़ना जरूरी है, ताकि विकास सभी के लिए लाभकारी हो। प्रो. के. सी. शर्मा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा को भारत की जड़ों और संस्कृति से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि अंग्रेजों की शिक्षा प्रणाली ने भारतीय ज्ञान को कमजोर किया और केवल नौकरी तक सीमित कर दिया। उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जिसमें ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता, संस्कार और भावनात्मक विकास भी

हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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