नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम : जितेंद्र सिंह

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम : जितेंद्र सिंह


शिमला, 19 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं को विकास की प्रक्रिया का लाभार्थी ही नहीं, बल्कि नेतृत्व करने वाली शक्ति बनाने का प्रयास किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में कहा कि वर्ष 2014 में सरकार बनने के बाद से महिला सशक्तिकरण केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के 15 अगस्त 2014 के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि लाल किले से शौचालय निर्माण की बात उठाना महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम था। उनके अनुसार स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण से बालिकाओं की पढ़ाई और महिलाओं के सम्मानजनक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

उन्होंने उज्ज्वला योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को धुएं से राहत मिली और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ। उनका कहना था कि पहले महिलाएं चूल्हे के धुएं में लंबे समय तक काम करती थीं, जबकि अब वे समय बचाकर अन्य गतिविधियों में भी भागीदारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिविल सेवाओं, तकनीकी शिक्षा, शोध और रक्षा सेवाओं जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना अवसरों के विस्तार का संकेत है।

नारी शक्ति वंदन कानून के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह कानून नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का रास्ता खोलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस पहल को आगे बढ़ाने में सहयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से महिला आरक्षण की बात करती रही, लेकिन इसे लागू नहीं कर पाई, जबकि मौजूदा सरकार ने 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता तैयार किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी दावा किया कि भाजपा ने अपने संगठन में महिलाओं को 33 प्रतिशत से अधिक भागीदारी दी है, जबकि कांग्रेस अपने संगठन में भी इसे लागू नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर विपक्ष का रुख निराशाजनक रहा है और आने वाले समय में महिलाएं इस मुद्दे पर अपनी राय लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त करेंगी।

इस अवसर पर भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सरोज पांडे ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” नारे का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका क्या रही।

सरोज पांडे ने कहा कि संसद में इस कानून को लेकर विपक्ष का रुख महिलाओं के मुद्दों पर उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि भाजपा आगे भी महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े कदम उठाने का दावा करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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