‘उम्र में छोटा हूं, टकराव नहीं चाहता’, लेकिन सिद्धांतों से समझौता नहीं होगा : विक्रमादित्य सिंह

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‘उम्र में छोटा हूं, टकराव नहीं चाहता’, लेकिन सिद्धांतों से समझौता नहीं होगा : विक्रमादित्य सिंह


शिमला, 15 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यूपी–बिहार के आईएएस–आईपीएस अधिकारियों को लेकर दिए गए अपने हालिया बयान और उससे उपजे प्रशासनिक–सियासी घमासान पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि वह उम्र में छोटे हैं और किसी भी तरह का टकराव या अनावश्यक विवाद नहीं चाहते, लेकिन प्रदेश के हितों, मूल्यों और सिद्धांतों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेंगे।

गुरुवार को शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि भारत एक संघीय गणराज्य है, जहां संविधान के तहत हर संस्था और पद की अपनी स्पष्ट जिम्मेदारियां तय हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का पहला और आखिरी उद्देश्य जनता की सेवा होना चाहिए। “मैं इस कुर्सी पर इसलिए बैठा हूं क्योंकि हिमाचल की जनता ने मुझे चुना है। मेरी प्राथमिकता ‘सर्विस ऑफ द पीपल’ है। अगर कहीं जनता के हित प्रभावित होते हैं या कोई कमी नजर आती है, तो उसे उठाना मेरा कर्तव्य और नैतिक जिम्मेदारी है।

अधिकारियों को लेकर दिए गए अपने बयान पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कोई भी सार्वजनिक सेवक खुद को शासक समझने की भूल न करे। उनके मुताबिक यदि कहीं ऐसा नजर आता है, तो जनप्रतिनिधियों का दायित्व बनता है कि वे सवाल उठाएं। “इस जिम्मेदारी से मैं कभी पीछे नहीं हटूंगा”।

मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान के बाद सामने आए आईपीएस अधिकारियों के रुख और मुख्यमंत्री से अपॉइंटमेंट मांगे जाने के मुद्दे पर भी विक्रमादित्य सिंह ने संयमित शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके मन में आईपीएस एसोसिएशन और सभी अधिकारियों के लिए पूरा सम्मान है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोग इतने कमजोर नहीं हैं कि उन्हें किसी अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता पड़े। उन्होंने कहा कि मेरे लिए प्रदेश की जनता का प्यार, समर्थन और आशीर्वाद ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। मुझे किसी और सुरक्षा की जरूरत नहीं है। जो भी सुरक्षा वापस लेनी है, ले सकते हैं।

सरकार के भीतर मंत्रियों के बीच सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध को लेकर चल रही चर्चाओं पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मतभेद स्वाभाविक हैं। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह अपने सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों और संस्कारों से कभी समझौता नहीं करेंगे। इन्हीं मूल्यों से किसी व्यक्ति की पहचान बनती है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि वह जहां भी रहेंगे, शिमला में हों या दिल्ली में, हिमाचल प्रदेश के लोगों के मुद्दे उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 75 लाख लोगों के प्रति मेरी जवाबदेही है। अगर मुझे कहीं भी लगेगा कि हिमाचल के हितों से समझौता हो रहा है, तो मैं लगातार आवाज उठाता रहूंगा।

बता दें कि यह पूरा विवाद विक्रमादित्य सिंह की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूपी और बिहार से आए कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारी “हिमाचलियत की धज्जियां उड़ा रहे हैं” और उन्हें हिमाचल के हितों से कोई सरोकार नहीं है। इस टिप्पणी के बाद हिमाचल प्रदेश में कार्यरत आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की शीर्ष संस्थाओं ने कड़ा ऐतराज जताया। आईपीएस एसोसिएशन ने इसे अखिल भारतीय सेवाओं की निष्पक्षता और एकता पर हमला बताया और यहां तक मांग कर दी कि विक्रमादित्य सिंह के साथ किसी भी आईपीएस अधिकारी की तैनाती न की जाए। आईएएस एसोसिएशन ने भी बयान जारी कर अधिकारियों को उनके मूल राज्य के आधार पर चिन्हित करने को अनुचित बताया। दिलचस्प यह है कि इस बयान की आलोचना उनकी ही सरकार के मंत्रियों अनिरुद्ध सिंह और जगत सिंह नेगी ने भी सार्वजनिक रूप से की।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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