मिल्क प्लांट द्वारा दूध न लेने से खफा लोगों ने दिया धरना, उपमंडलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

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मिल्क प्लांट द्वारा दूध न लेने से खफा लोगों ने दिया धरना, उपमंडलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन


मंडी, 16 जून (हि.स.)। मंडी जिले की बल्ह घाटी में स्थापित चक्कर मिल्क प्लांट प्रबंधन द्वारा दुग्ध उत्पादकों से दूध लेने की सीमा तय करने व मिल्क होलीडे करने के विरोध में मंगलवार को विधायक इंद्र सिंह गांधी की अगुवाई में बल्ह के दुग्ध उत्पादकों ने प्रदेश सरकार व मिल्क फेडरेशन प्रबंधन के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया तथा एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा।

गौरतलब है कि चक्कर मिल्क प्लांट प्रबंधन ने हर दुग्ध उत्पादक से केवल 20 लीटर दूध ही प्रतिदिन लेने व महीने में कुछ दिन मिल्क होलीडे के नाम पर दुग्ध संग्रह न करने का निर्णय लिया है। इससे दुग्ध उत्पादकों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। यहां तक कि पहले तो बल्ह के एक दुग्ध उत्पादक ने कुछ दिन पहले मिल्क प्लांट के सामने दूध उल्टा दिया और विरोध जताया, फिर दुग्ध उत्पादकों ने प्लांट के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया व दूध को लोगों में वितरित करना शुरू कर दिया, खीर बनाकर बांटी गई व विरोध जताया गया।

इसी कड़ी में मंगलवार को नेरचौक में उपमंडलाधिकारी बल्ह के कार्यालय में धरना दिया गया। यह भी चेतावनी दी गई कि यदि उत्पादकों के सारे दूध को नहीं खरीदा गया, महीने में सभी दिन इसका संग्रह नहीं किया गया व कई महीनों से रोकी गई पेमेंट की अदायगी न की गई तो उत्पादक अपना आंदोलन और तेज कर देंग। ज्ञापन पर भाजपा बल्ह रिवालसर मंडल के प्रधान आर राणा व नेरचौक मंडल के अध्यक्ष के साथ साथ 50 दुग्ध उत्पादकों के हस्ताक्षर हैं।

इधर, मिल्कफेड की चक्कर इकाई के प्रभारी विश्वकांत शर्मा ने कहा कि दूध के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी के उपरांत ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन की ओर लोगों का रूझान उत्तरोत्तर बढ़ा है। जनवरी, 2023 में जहां मिल्क प्लांट चक्कर से केवल 9153 दुग्ध उत्पादक जुड़े थे, वहीं वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 21 हजार को पार कर चुका है।

उन्होंने बताया कि एक दुग्ध उत्पादक किसान से औसतन प्रतिदिन 6 लीटर दूध का प्रापण किया जा रहा है। प्रदेश सरकार व मिल्कफेड का प्रयास है कि अधिकाधिक लघु एवं सीमांत दुग्ध उत्पादकों को इस व्यवसाय से जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि मिल्क प्लांट चक्कर की क्षमता वर्तमान में 50 हजार लीटर दूध प्रतिदिन की है और एक लाख लीटर प्रतिदिन दूध का प्रापण यहां किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए हैं। इसके तहत यहां एक अतिरिक्त पॉश्चराइजर स्थापित किया गया है। इसके अलावा शीघ्र ही यहां रेफ्रिजरेशन की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है, जिसकी प्रक्रिया जारी है। इन प्रयासों से चक्कर इकाई की क्षमता बढ़कर लगभग डेढ़ लाख लीटर की हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादकों को भुगतान की प्रक्रिया में भी तेजी लाई गई है। मिल्क प्लांट चक्कर इकाई के तहत अप्रैल, 2026 में लगभग 15 करोड़ 70 लाख रुपए का भुगतान दुग्ध उत्पादक किसानों को किया जा चुका है। मई माह के लिए भी लगभग साढ़े 16 करोड़ रुपए का भुगतान शीघ्र ही कर दिया जाएगा। मिल्क प्लांट चक्कर के तहत अभी तक 19,444 दुग्ध उत्पादकों के बैंक खातों का ब्यौरा प्राप्त कर लिया गया है और शेष उत्पादकों से यह जानकारी एकत्र की जा रही है। संबंधित बैंकों से इनके खातों की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। इसके पूरा होते ही दूध का पैसा सीधे किसानों को खाते में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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