शिमला नगर निगम अधिकारी की मौत के बाद मिला सुसाइड नोट, मानसिक तनाव का जिक्र
शिमला, 09 मई (हि.स.)। शिमला नगर निगम में तैनात डिप्टी कंट्रोलर रामेश्वर शर्मा की आत्महत्या के मामले में जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। देर रात पुलिस ने जब उनके घर की दोबारा तलाशी ली तो वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि रमेश्वर शर्मा ने नोट में मानसिक तनाव का जिक्र किया है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति, अधिकारी या अन्य किसी पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया है। पुलिस ने सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है और अब मामले के हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
पुलिस अब रामेश्वर शर्मा के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल भी खंगालने की तैयारी में है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि शुक्रवार को उन्होंने किन-किन लोगों से बात की थी और आखिरी बार किससे बातचीत हुई थी। पुलिस मान रही है कि इससे आत्महत्या के कारणों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
पुलिस के अनुसार शुक्रवार को पुलिस कंट्रोल रूम 112 के माध्यम से थाना छोटा शिमला को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति को गंभीर हालत में उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला लाया गया है। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान रमेश्वर शर्मा पुत्र तुलसी राम निवासी गांव सीमा, डाकघर रत्नाड़ी, तहसील रोहड़ू, जिला शिमला के रूप में हुई है। उनकी उम्र करीब 45 वर्ष थी। वह वर्तमान में शिमला के मेहली में रह रहे थे और नगर निगम शिमला में डिप्टी कंट्रोलर के पद पर कार्यरत थे।
प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि शुक्रवार को रामेश्वर शर्मा सामान्य दिनों की तरह कार्यालय गए थे, लेकिन तय समय से पहले घर लौट आए। पुलिस के मुताबिक उनकी पत्नी ने उन्हें घर में फंदे से लटका हुआ पाया। इसके बाद उन्हें तुरंत उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शिमला के एसएसपी गौरव सिंह ने सुसाइड नोट मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और सुसाइड नोट को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस मामले में बीएनएसएस की धारा 194 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जा रही है और जांच के आधार पर आगे अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
रामेश्वर शर्मा की मौत के बाद एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में अधिकारियों की संदिग्ध मौतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले पिछले वर्ष हिमाचल पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध मौत का मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था। मार्च 2025 में विमल नेगी अचानक लापता हो गए थे और बाद में उनका शव बिलासपुर जिले में गोविंद सागर झील से बरामद हुआ था। उस मामले में आरोप लगे थे कि विभागीय प्रताड़ना के कारण उन्होंने आत्महत्या की। शिमला पुलिस ने उस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था। बाद में हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

