मणीमहेश यात्रा : बिना पंजीकरण नहीं मिलेगी अनुमति, पिछले साल की आपदा से सबक लेकर प्रशासन ने सख्त किए नियम
शिमला, 13 जुलाई (हि.स.)। इस वर्ष चम्बा जिला में पवित्र मणीमहेश यात्रा पर जाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। जिला चम्बा प्रशासन ने साफ किया है कि बिना पंजीकरण किसी भी श्रद्धालु को यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पिछले वर्ष मानसून के दौरान यात्रा मार्ग पर आई प्राकृतिक आपदा ने प्रशासन के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी थीं। इसी अनुभव के आधार पर इस बार यात्रा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है।
चम्बा के उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने सोमवार को बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से राधा अष्टमी तक चलने वाली मणीमहेश यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं का पंजीकरण अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि बिना पंजीकरण किसी को भी यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनके अनुसार अभी भी श्रद्धालुओं का मणीमहेश की ओर आना शुरू हो चुका है और यात्रा मार्ग पर वन विभाग की एक पोस्ट स्थापित की गई है, जहां यात्रियों का पंजीकरण किया जा रहा है।
उपायुक्त ने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें विभिन्न स्थानों पर तैनात रहेंगी। मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी अवश्य लें और प्रशासन की ओर से जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
मणीमहेश यात्रा हिमाचल प्रदेश की सबसे प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल है।
चम्बा जिले के भरमौर क्षेत्र में समुद्र तल से करीब 4,080 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र मणीमहेश झील को भगवान शिव का निवास माना जाता है। हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से राधा अष्टमी के बीच देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु यहां पवित्र स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
पिछले वर्ष यात्रा के दौरान लगातार भारी बारिश ने पूरे क्षेत्र में व्यापक नुकसान पहुंचाया था। कई स्थानों पर यात्रा मार्ग टूट गए थे, पुल बह गए थे। यात्रा के दौरान 20 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, वहीं, हजारों श्रद्धालु अलग-अलग जगहों पर फंस गए थे। उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर विशेष राहत एवं बचाव अभियान चलाया था। प्रशासन, पुलिस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला था।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

