मंडी के 500 वर्षों के इतिहास के दस्तावेजीकरण में विद्वानों की भूमिका महत्वपूर्ण : आचार्य ललित कुमार अवस्थी
मंडी, 11 जून (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के इतिहास विभाग द्वारा मंडी की 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा विषय पर एक शोध गोष्ठी का आयोजन विभागीय सभागार में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार डॉ. गंगा राम राजी ने की।
कार्यक्रम के संयोजक एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने उपस्थित विद्वानों का स्वागत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय की एक विशेष शोध परियोजना के अंतर्गत मंडी के 500 वर्षों के इतिहास पर एक व्यापक पुस्तक का लेखन कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि मंडी का इतिहास केवल क्षेत्रीय इतिहास नहीं बल्कि हिमालयी सभ्यता और संस्कृति की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने कहा कि इतिहास के प्रामाणिक दस्तावेजीकरण से भावी पीढ़ियों को अपने अतीत को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विद्वानों से आग्रह किया कि वे शोध आधारित एवं तथ्यपरक लेखन के माध्यम से मंडी की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दें। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित इस परियोजना को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल बताते हुए इसके सफल क्रियान्वयन के लिए इतिहास विभाग को बधाई दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. गंगा राम राजी ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसके इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों से निर्मित होती है। मंडी का इतिहास विविध आयामों से समृद्ध है, जिसके व्यवस्थित संकलन और प्रकाशन की आवश्यकता लंबे समय से अनुभव की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी बल्कि मंडी की ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थापित होगी।
इस अवसर पर डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पुस्तक में मंडी रियासत के राजनीतिक इतिहास, धार्मिक परंपराओं, पुरातात्विक धरोहरों, लोक संस्कृति, कला एवं स्थापत्य, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान तथा आधुनिक विकास यात्रा जैसे विभिन्न विषयों को शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य मंडी की ऐतिहासिक यात्रा को शोधपरक एवं प्रामाणिक रूप में संकलित कर एक स्थायी अकादमिक दस्तावेज तैयार करना है। इसी उद्देश्य से लेखन कार्य से जुड़े विद्वानों की यह गोष्ठी आयोजित की गई है ताकि पुस्तक की रूपरेखा, विषय-वस्तु एवं शोध की दिशा पर विचार-विमर्श किया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

