शिमला में गैस सिलेंडर की कमी का असर विधानसभा तक, बजट सत्र के लिए लकड़ी के चूल्हों पर बन रहा खाना

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शिमला में गैस सिलेंडर की कमी का असर विधानसभा तक, बजट सत्र के लिए लकड़ी के चूल्हों पर बन रहा खाना


शिमला, 19 मार्च (हि.स.)। राजधानी शिमला में कमर्शियल एलपीजी की कमी का असर अब सीधे विधानसभा के बजट सत्र पर भी दिखने लगा है। हालात ऐसे हैं कि जहां आम तौर पर बड़े पैमाने पर गैस सिलेंडरों पर खाना तैयार किया जाता था, वहीं अब सत्र के दौरान सैकड़ों लोगों के लिए भोजन पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों पर बनाया जा रहा है। यह स्थिति न सिर्फ असामान्य है बल्कि इससे व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव भी साफ दिखाई दे रहा है।

दरअसल, विधानसभा सत्र के दौरान रोजाना बड़ी संख्या में विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण रसोइयों को पुराने तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। लकड़ी खरीदकर बड़े स्तर पर खाना बनाया जा रहा है। इससे काम में ज्यादा समय लग रहा है और मेहनत भी बढ़ गई है।

यह व्यवस्था खास तौर पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के होटलों हॉलिडे होम और पीटरहॉफ़ में देखने को मिल रही है, जहां से विधानसभा के लिए भोजन तैयार होता है। रसोइयों का कहना है कि गैस की कमी के बावजूद उन्हें तय समय पर बड़ी मात्रा में खाना तैयार करना पड़ रहा है और ऐसे में लकड़ी के चूल्हे ही एकमात्र विकल्प बचा है। हालांकि इस तरीके से खाना बनाना चुनौतीपूर्ण है, फिर भी व्यवस्था को किसी तरह बनाए रखा जा रहा है।

इस बीच जिला प्रशासन का कहना है कि घरेलू गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने गैस आपूर्ति करने वाली कंपनियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की और निर्देश दिए कि अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, होटल और रेस्टोरेंट जैसे जरूरी संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर कमर्शियल गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि जिले में घरेलू गैस, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और इनकी आपूर्ति लगातार जारी है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक भंडारण न करें, क्योंकि इससे कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है। प्रशासन का कहना है कि तेल कंपनियों के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि जरूरी चीजों की आपूर्ति बाधित न हो।

साथ ही सभी उपमंडल दंडाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों के साथ रोजाना बैठक कर हालात की समीक्षा कर रहे हैं। होटल और रेस्टोरेंट में घरेलू गैस सिलेंडरों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है जिससे नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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