चने की खेती में भी रंग लाई हरनेड़ के ललित कालिया की मेहनत

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चने की खेती में भी रंग लाई हरनेड़ के ललित कालिया की मेहनत


हमीरपुर, 16 मई (हि.स.)। प्राकृतिक खेती में सराहनीय कार्य कर रहे हमीरपुर के निकटवर्ती गांव हरनेड़ के ललित कालिया ने इस सीजन में भी प्राकृतिक खेती से चने की खेती करके अच्छी-खासी पैदावार हासिल करके अन्य किसानों के लिए एक मिसाल कायम की है।

ललित कालिया ने बताया कि इस बार उन्होंने गेहूं के साथ ही चने की बुआई भी की थी। वह अपने खेतों में किसी भी तरह की रासायनिक खाद या कीटनाशक का प्रयोग नहीं करते हैं। इस बार उन्हें गेहूं के साथ ही लगभग 75 किलोग्राम चने की पैदावार भी हुई है। इस चने की क्वालिटी बहुत ही अच्छी है।

इससे पहले, ललित कालिया ने प्राकृतिक खेती से ही मात्र 18 मरले जमीन पर गन्ना लगाकर पहले ही सीजन में लगभग 70 किलोग्राम शक्कर तैयार की थी। वह पुराने देसी बीजों का संरक्षण भी कर रहे हैं। उन्हाेंने अपने घर में ही गेहूं और मक्की के साथ-साथ कई पारंपरिक मोटे अनाज, दलहनी और तिलहनी फसलों तथा सब्जियों के प्राचीन देसी बीजों का एक अच्छा-खासा बैंक तैयार कर लिया है।

उनके पास गेहूं की आठ किस्मों के देसी बीज उपलब्ध हैं। मक्की तथा जौ की भी देसी किस्में उन्होंने संरक्षित की है जोकि पौष्टिक गुणों से भरपूर हैं और कम बारिश में भी अच्छी पैदावार देती हैं। कई पारंपरिक एवं लुप्त होती मोटे अनाज की फसलें जैसे-मंढल, कोदरा, कौंगणी और बाजरा के बीज भी ललित कालिया के बीज बैंक में मिल जाते हैं। सरसों और तिल की कई पुरानी किस्मों, दलहनी फसलों में कुल्थ, रौंग, माह तथा चने के देसी भी इस बीज बैंक में हैं। उनके पास लहसुन, प्याज, भिंडी, घीया, कद्दू, रामतोरी, धनिया, मैथी और अन्य फसलों के पुराने एवं दुर्लभ बीज भी उपलब्ध हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विशाल राणा

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