हिमाचल की प्रसिद्घ लोकगायिका गंभरी देवी के जीवन पर शोध कार्य करेंगे युवा लेखक आयुष शर्मा
धर्मशाला, 11 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के युवा लेखक आयुष शर्मा 'प्रधानमंत्री युवा लेखक परामर्श' योजना के अंतर्गत राज्य की प्रसिद्ध लोकगायिका स्वर्गीय गम्भरी देवी द्वारा पहाड़ी परंपराओं, लोकजीवन और सांस्कृतिक क्षेत्र में किये गए उनके योगदान पर शोध कार्य करेंगे। इस शोध कार्य को राष्ट्रीय बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित किया जायेगा।
इस योजना के अन्तर्गत देश भर से 30 साल से कम उम्र के 43 लेखकों को चुना गया है और हिमाचल प्रदेश से चुने जाने वाले वह पहले लेखक हैं। वह मूल रूप से बिलासपुर जिला के चल्हेली गांव से सम्बन्ध रखते हैं और इस समय जयपुर की मनिपाल यूनिवर्सिटी से बीबीए कर रहे हैं। उनके पिता ज्ञान चन्द हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं जबकि उनकी अनिता देवी एक कुशल गृहणी हैं।
वह डॉ. प्रो. कमला कौशिक के मार्गदर्शन में यह शोध कार्य करेंगे। डॉ. प्रो. कमला कौशिक दिल्ली विश्वविद्यालय की रिटायर्ड प्रोफेसर हैं और मूलतः मण्डी जिला के गोहर से सम्बन्ध रखती हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लोक संगीत पर गहन शोध कार्य किया है।
गौरतलब है कि लोकगायिका गम्भरी देवी ने पहाड़ी लोकसंगीत को नई पहचान दिलाते हुए लोकसंस्कृति को सशक्त स्वर प्रदान किया। बिलासपुर क्षेत्र से संबंध रखने वाली इस महान कलाकार ने अपनी मधुर और प्रभावशाली आवाज़ के माध्यम से प्रदेश की परंपराओं, लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पंहुचाया। उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2001 में हिमाचल अकादमी ऑफ आर्ट्स का अचीवमेंट अवॉर्ड तथा 2011 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रतिष्ठित टैगोर अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके गीत आज भी हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल हिस्सा हैं। उनके प्रसिद्ध लोकगीत “खाणा पीणा नंद लेणी ओ गंभरिए…” आज भी जन जन में लोगों के दिलों में धड़कता है। उनका जन्म 1922 में बिलासपुर, जिला के बंदला गांव में हुआ था जबकि उन्होंने 8 जनवरी 2013 को इस नशवर शरीर को अलविदा कह दिया था।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

