कांगड़ा में ट्रेकिंग से पहले पंजीकरण अनिवार्य, 15 अक्तूबर तक लागू रहेंगे आदेश

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धर्मशाला, 08 जुलाई (हि.स.)। कांगड़ा जिले की धौलाधार पर्वत श्रृंखला के विभिन्न ट्रेकिंग रूटों पर ट्रैकिंग करने से पहले पंजीकरण करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। हाल के समय में ट्रेकर्स के फंसने, लापता होने तथा दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट कांगड़ा हेमराज बैरवा ने यह आदेश जारो किये हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और आगामी 15 अक्तूबर, 2026 तक प्रभावी रहेंगे।

जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि मानसून के दौरान भूस्खलन, घना कोहरा, फ्लैश फ्लड, कम दृश्यता तथा फिसलन भरे रास्तों के कारण ट्रेकिंग गतिविधियां अधिक जोखिमपूर्ण हो जाती हैं। कई मामलों में ट्रेकर्स द्वारा अपनी यात्रा की पूर्व सूचना अथवा निर्धारित मार्ग की जानकारी साझा नहीं किए जाने के कारण खोज एवं बचाव अभियान लंबा, चुनौतीपूर्ण तथा संसाधन-गहन बन जाता है। इससे न केवल ट्रेकर्स बल्कि बचाव दल के सदस्यों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, कांगड़ा द्वारा जिले के दस प्रमुख ट्रेकिंग रूटों की पहचान की गई है। धौलाधार पर्वत श्रृंखला में 3600 मीटर से 4600 मीटर तक की ऊंचाई वाले इन ट्रेकिंग रूटों में बलेणी, मिनिकियाणी, भीमघसूतड़ी, इंद्रहार, कुंदली, तोराल, तालंग, सिंघाड़, वरू तथा जालसू पास शामिल हैं। इन सभी ट्रेकिंग मार्गों के प्रारंभिक बिंदुओं पर आपदा प्रबंधन चेक पोस्ट स्थापित किए जाएंगे, जो प्रतिदिन प्रातः 5 बजे से सायं 5 बजे तक संचालित रहेंगे।

आदेशों के अनुसार, इन चिन्हित ट्रेकिंग रूटों पर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति अथवा समूह के लिए ट्रेक शुरू करने से पूर्व संबंधित चेक पोस्ट पर व्यक्तिगत रूप से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही अपनी विस्तृत यात्रा योजना, संपर्क विवरण तथा वापसी का संभावित समय भी दर्ज कराना होगा।

जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अथवा समूह बिना पंजीकरण के ट्रेकिंग करता है या बिना सूचना दिए निर्धारित मार्ग से भटक जाता है और किसी दुर्घटना अथवा आपदा का शिकार होता है, तो उसके बचाव के लिए आवश्यकता पड़ने पर निजी बचाव दलों की सेवाएं ली जाएंगी। ऐसे सभी बचाव अभियानों पर होने वाला व्यय संबंधित व्यक्ति अथवा समूह से वसूल किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आदेशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 तथा भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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