पर्यटन पॉलिसी में फेरबदल का होटल एसोसिएशन ने जताया कड़ा विरोध

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धर्मशाला, 24 फ़रवरी (हि.स.)। होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन, धर्मशाला ने हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित पॉलिसी के बदलावों पर गंभीर चिंता जताते हुए कड़ा विरोध जताया है।

एसोसिएशन ने प्रस्तावित पॉलिसी और पर्यटक वाहनों की एंट्री फीस में की जाने वाली भारी वृद्धि पर भी कड़ा एतराज जताया है। एसोसिएशन ने मौजूदा टूरिज्म यूनिट्स के लिए प्रस्तावित ज़रूरी फायर डिपार्टमेंट एनओसी पर कड़ा एतराज़ जताते हुए कहा है कि पुरानी बिल्डिंग्स के लिए ऐसे नियम प्रैक्टिकल नहीं हैं। कई मौजूदा होटल स्ट्रक्चर के हिसाब से 1 लाख लीटर से ज़्यादा के अंडरग्राउंड पानी के टैंक नहीं रख सकते और न ही उनकी छतें बड़े वॉटर स्टोरेज सिस्टम का एक्स्ट्रा लोड झेल सकती हैं। डिज़ाइन और जगह की कमी के कारण पुरानी बिल्डिंग्स में फायर स्प्रिंकलर और हाइड्रेंट सिस्टम लगाना भी मुमकिन नहीं है।

इसके अलावा, पानी की सप्लाई में गड़बड़ी के कारण कई होटल पहले से ही टैंकर के पानी पर निर्भर हैं।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी बांबा ने कहा कि सरकार को टूरिस्ट हब्स में हाइड्रेंट और वॉटर स्टोरेज सिस्टम जैसे फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने चाहिए, न कि पूरा बोझ अलग-अलग यूनिट्स पर डालना चाहिए। उन्होंने पुरानी बिल्डिंग्स के लिए नियमों में ढील देने और किसी भी नए नियम के नोटिफिकेशन के बाद कम से कम एक साल का कम्प्लायंस पीरियड तय करने की भी मांग की है।

एसोसिएशन ने अप्रैल 2026 से बाहरी गाड़ियों के लिए एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी का भी विरोध किया है। प्रस्ताव के अनुसार, छोटी गाड़ियों के लिए एंट्री टैक्स 70 से बढ़ाकर 170 और टेम्पो ट्रैवलर्स के लिए 320 से बढ़ाकर 570 किया जाएगा। इस बढ़ोतरी से टूरिस्ट हतोत्साहित हो सकते हैं और हिमाचल प्रदेश एक ट्रैवल डेस्टिनेशन के तौर पर कम कॉम्पिटिटिव हो सकता है।

होटल रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल फीस में तेज़ी से बढ़ोतरी को लेकर भी एसोसिएशन ने गंभीर चिंता जताई गई है। उन्होंने बताया कि इस नई पालिसी के बाद 20 कमरों वाला होटल जो अभी लगभग 2,500 दे रहा है, उसे प्रस्तावित स्ट्रक्चर के तहत 80 हजार से एक लाख के बीच देना पड़ सकता है। एसोसिएशन ने इस बढ़ोतरी को गलत और नुकसानदायक बताया, खासकर छोटे और मीडियम ऑपरेटरों के लिए।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विनी बांबा ने बताया कि होटल इंडस्ट्री पहले से ही बहुत ज़्यादा दबाव में है, एवरेज ऑक्यूपेंसी 20 प्रतिशत से कम है। साथ ही खराब सड़कें और खराब टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर भी है, जिससे टूरिस्ट आना बंद हो रहे हैं।

एसोसिएशन ने अधिकारियों से इन फैसलों पर फिर से सोचने, स्टेकहोल्डर्स के साथ सलाह-मशविरा करने और सेक्टर की लगातार ग्रोथ पक्का करने के लिए प्रैक्टिकल, फेज़ में और टूरिज्म-फ्रेंडली पॉलिसी लागू करने की अपील की है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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