पेंपा सेरिंग बुधवार को लेंगे निर्वासित तिब्बत सरकार के सिक्योंग पद की शपथ

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पेंपा सेरिंग बुधवार को लेंगे निर्वासित तिब्बत सरकार के सिक्योंग पद की शपथ


धर्मशाला, 26 मई (हि.स.)। धर्मशाला से चलने वाली निर्वासित तिब्बत सरकार के नवनिर्वाचित सिक्योंग यानी राष्ट्रपति पेंपा सेरिंग बुधवार को पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। बुधवार सुबह करीब आठ बजे मैक्लोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मठ चुगलाखांग यानी दलाईलामा टेंपल में आयोजित किया जाएगा। समारोह में 14वें तिब्बती धर्मगुरू दलाईलामा की उपस्थिति में पेंपा सेरिंग दूसरी बार नए राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण कर पदभार संभालेंगे।

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) की ओर से आयोजित किए जाने वाले समारोह को तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। कार्यक्रम में विभिन्न गणमान्य अतिथि, अधिकारी, विदेशी प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम तिब्बती शामिल होंगे। सीटीए प्रशासन का कहना है कि यह आयोजन न केवल तिब्बती समुदाय बल्कि वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों और तिब्बती संघर्ष के समर्थन का प्रतीक बनेगा। सीटीए की ओर से शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां मंगलवार को पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और अतिथियों के स्वागत के लिए प्रशासनिक स्तर पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 1959 में चीन द्वारा तिब्बत पर पूरी तरह कब्जे के बाद धर्मगुरु दलाईलामा की अगुवाई में हज़ारों तिब्बतियों को निर्वासित होकर आर्य देश भारत में शरण लेनी पड़ी थी। दलाई लामा के भारत पंहुचते ही तिब्बत की पुन: स्वतन्त्रता प्राप्ति हेतु निर्वासित तिब्बती सरकार का गठन हुआ जिसका पूरा नियंत्रण वर्ष 2011 तक दलाई लामा के पास था। हालांकि बाद में 2011 में पहली बार दलाई लामा ने अपनी शक्तियों को छोड़कर राजनीतिक विरासत को लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री का चुनाव करवाया। पहली बार डॉ लोबसांग सांगये ने यह चुनाव जीता और पहले लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए निर्वासित तिब्बत सरकार के मुखिया बने। पांच वर्षों के बाद फिर चुनाव हुए और डॉ लोबसांग सांगये दूसरी बार प्रधानमंत्री चुने गए। वहीं अगले चुनाव वर्ष 2022 में दोबारा चुनाव हुए और इस बार पेंपा सेरिंग इस पद पर चुने गए।

तिब्बती संसद के संविधान के मुताबिक डॉ सांगये दो बार चुनाव लड़ने के बाद चुनाव नही लड़ पाए। वहीं इस बार हुए चुनाव में दोबारा तिब्बती समुदाय की पसंद पेंपा सेरिंग ही बने। जिसके लिए विश्व भर के विभिन्न 27 देशों में रह रहे तिब्बतियों ने मतदान किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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