पौंग डैम में पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, श्रीनगर की तर्ज पर चलेगी शिकारा-हाउस बोट

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पौंग डैम में पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, श्रीनगर की तर्ज पर चलेगी शिकारा-हाउस बोट


धर्मशाला, 08 जून (हि.स.)। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने के मुख्यमंत्री के प्रयासों को धरातल पर उतारने के लिए पर्यटन विभाग ने काम करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कांगड़ा जिला के पौंग डैम में जल क्रीड़ा और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार को लेकर नई योजना पर काम शुरू हो गया है। पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए पौंग डैम को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से कल मंगलवार को बायो डायवर्सिटी कंजरवेशन सोसायटी और जिला वाटर स्पोटर्स एंड अलाइड एक्टिविटी सोसायटी की संयुक्त बैठक हो रही है।

बैठक में पर्यटन गतिविधियों को व्यापक स्तर पर बढ़ाने, आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाने तथा भविष्य का रोडमैप तैयार करने पर चर्चा होगी।

वर्तमान में पौंग डैम में पर्यटन गतिविधियों का संचालन बायो डायवर्सिटी कंजरवेशन सोसायटी तथा जिला वाटर स्पोटर्स एंड अलाइड एक्टिविटी सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा है।

जिला वाटर स्पोटर्स एंड अलाइड एक्टिविटी सोसायटी की ओर से रिजनल वाटर स्पोटर्स सेंटर में विभिन्न जल क्रीड़ा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हालांकि पौंग झील का विशाल क्षेत्र पर्यटन गतिविधियों के लिए उपयुक्त है, लेकिन आधुनिक और पर्याप्त उपकरणों की कमी के कारण इसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

जानकारी अनुसार बैठक में जल क्रीड़ा गतिविधियों के लिए नए और उन्नत उपकरण उपलब्ध करवाने पर विचार किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इसके अलावा पौंग डैम के चयनित क्षेत्रों में शिकारा और हाउस बोट संचालन की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा होगी।

अधिकारियों का मानना है कि इससे प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बैठक में पौंग डैम क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण और पर्यटन विकास को साथ लेकर चलने की रणनीति पर भी विचार होगा। विदेशी परिंदों के आगमन के दौरान चार माह तक बड़ी संख्या में पर्यटक पौंग झील पहुंचते हैं। ऐसे में बर्ड वॉचिंग, नेचर टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स को एकीकृत कर पर्यटन को नई दिशा देने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बरसात के लगभग दो माह को छोड़कर पौंग डैम में जल क्रीड़ा गतिविधियां सुरक्षित रहती हैं। यहां कार्यरत सभी बोटमैन प्रशिक्षित और प्रमाणित हैं, जो मौसम की परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही पर्यटकों को जलाशय में लेकर जाते हैं। आने वाले समय में रेल, सड़क और हवाई संपर्क बेहतर होने से भी पौंग डैम में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

वहीं पर्यटन विभाग कांगड़ा के उपनिदेशक विनय धीमान ने कहा कि पौंग डैम में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। विभाग विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर यहां जल क्रीड़ा और प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बैठक में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने, आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाने तथा नए पर्यटन उत्पाद विकसित करने पर चर्चा होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पर्यटन विकास के साथ-साथ पौंग झील की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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