सांसद अनुराग शर्मा की पैरवी के चलते आचार संहिता हटते ही पठानकोट-जोगिंदर नगर ट्रैक पर दौड़ेगी रेलगाड़ियां
धर्मशाला, 13 मई (हि.स.)। कांगड़ा घाटी की पहाड़ी ढलानों पर अंग्रेजों के जमाने में बिछाई गई रेल पटरी पर अब जल्द ही दोबारा से रेल गाड़ियों के छुकछुक सुनाई देगी। रेल विभाग ने इसके लिए तैयारियां पूर्ण कर ली है, केवल दिक्कत यह है कि वर्तमान में राज्य में चल रहे पंचायती राज चुनाव के दृष्टिगत आदर्श आचार संहिता लागू है। रेल अधिकारियों की माने तो आचार संहिता हटते ही पठानकोट से जोगिंदर नगर तक रेल गाड़ियां बहाल कर दी जाएंगी। बुधवार को रेलवे विभाग द्वारा अधिकारी के तौर पर रेल इंजन और डिबों के साथ पठानकोट से जोगिंदर नगर तक रेलवे का आखिरी ट्रायल कर लिया गया है।
गौरतलब है कि बीते 5 मई को राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने कांगड़ा वाली रेलवे बहाली संघर्ष समिति के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए ज्वालामुखी रोड रेलवे स्टेशन पर बाकायदा धरना दिया था और रेल विभाग को 10 दिनों के भीतर रेल गाड़ियां बहाल करने का अल्टीमेट दिया गया था इसी का नतीजा है कि रेल विभाग द्वारा चुनाव के ठीक बाद रेल गाड़ियों की बहाली की जा सकेगी।
इस बारे राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने कहा कि कांगड़ा घाटी की इस प्रतिष्ठित रेल लाइन पर जल्द ही रेल गाड़ियों का आवागमन शुरू होगा। यह रेल मार्ग उन लोगों के लिए भाग्य रेखा मानी जाती है जो की पोंग डैम के किनारे या फिर जिला कांगड़ा के दूरदराज के क्षेत्र में बसे हुए हैं और यही एकमात्र रेल सेवा उनके लिए यातायात का मुख्य विकल्प है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सूरत में डलहौजी रोड से रेल गाड़ियों का संचालन कबूल नहीं होगा। उन्होंने पठानकोट से ही इस मार्ग पर रेल गाड़ियों के संचालन को रेल विभाग सुनिश्चित करें।
उधर वरिष्ठ वाणिज्यिक प्रबंधक जम्मू डिवीज़न उचित सिंघल ने बताया कि कमिश्नर रोड सेफ्टी द्वारा व्यापक निरीक्षण के बाद रेल विभाग रेल गाड़ियों को चलाने के लिए तैयार है हालांकि डिब्बों की हालत और भविष्य की परिस्थितियों को देखते हुए पहले चरण में पठानकोट से बैजनाथ पपरोला तक चार जोड़ी रेल गाड़ियों का संचालन किया जाएगा और उसके बाद सभी रेलगाड़ियां की बहाली की जाएगी। वर्तमान समय में कांगड़ा से बैजनाथ का पपरोला और बैजनाथ पपरोला से जोगिंदर नगर तक दो जोड़ी रेल गाड़ियों का संचालन किया जा रहा है जो कि यात्रियों की संख्या और सुविधा की दृष्टि से नाकाफी है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

