झूठी एफआईआर लिखने वालों को मलाईदार पोस्टिंग, कानून-व्यवस्था संभालने वालों का तबादला : सुधीर शर्मा

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झूठी एफआईआर लिखने वालों को मलाईदार पोस्टिंग, कानून-व्यवस्था संभालने वालों का तबादला : सुधीर शर्मा


धर्मशाला, 07 अगस्त (हि.स.)। भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने कांगड़ा पुलिस अधीक्षक कार्यालय से पुलिस कर्मियों के जारी तबादला आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय राजनीतिक हितों के अनुसार पुलिस व्यवस्था चलाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि जिस समय प्रदेश में अपराध और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां बढ़ रही हैं, उस समय सरकार का पूरा ध्यान राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को संरक्षण देने पर दिखाई दे रहा है।

सुधीर शर्मा ने कहा कि जारी तबादला आदेश में कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का संदेश साफ है—जो अधिकारी राजनीतिक दबाव में काम करेंगे और विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि कानून-व्यवस्था को निष्पक्ष ढंग से संभालने वाले अधिकारियों को इधर-उधर भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में भाजपा नेताओं के खिलाफ जिस प्रकार एक के बाद एक मामले दर्ज किए गए, उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार पुलिस का उपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के औजार के रूप में कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विरुद्ध, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, विधायक आशीष शर्मा, विधायक होशियार सिंह, विधायक सुधीर शर्मा सहित अनेक भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई की गई। भाजपा का आरोप है कि ये मामले राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित हैं।

सुधीर शर्मा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में कानून के राज में विश्वास करती है तो उसे पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन अधिकारियों को आगे बढ़ा रही है जिन्होंने विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि निष्पक्ष और ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल गिराया जा रहा है।

सुधीर शर्मा ने कहा कि भाजपा पुलिस बल का सम्मान करती है और चाहती है कि पुलिस पूरी निष्पक्षता के साथ कार्य करे। उन्होंने मांग की कि पुलिस प्रशासन को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए तथा तबादलों और नियुक्तियों में केवल प्रशासनिक आवश्यकता और जनहित को आधार बनाया जाए, न कि राजनीतिक निष्ठा को। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस का दायित्व कानून का निष्पक्ष पालन कराना है, न कि किसी राजनीतिक दल के हितों की पूर्ति करना। यदि सरकार इसी प्रकार प्रशासन का राजनीतिकरण करती रही तो जनता उचित समय पर इसका लोकतांत्रिक जवाब देगी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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