एआई-डिजिटल तकनीक के युग में शिक्षक की भूमिका पहले से महत्वपूर्ण : प्रो. बंसल

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एआई-डिजिटल तकनीक के युग में शिक्षक की भूमिका पहले से महत्वपूर्ण : प्रो. बंसल


धर्मशाला, 05 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) एस.पी. बंसल ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि चरित्र निर्माता, मार्गदर्शक, शोधकर्ता, नवाचार के प्रेरक और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने यह बात शनिवार को शिक्षक दिवस के मौके पर अपने संदेश में कही। कुलपति ने कहा कि शिक्षक दिवस केवल एक पेशे का सम्मान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के व्यापक उद्देश्य पर चिंतन करने का दिन है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों का निर्माण करना है जो ज्ञान, विवेक, संवेदनशीलता, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त हों।

शिक्षक दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए कुलपति ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान सदैव अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गुरु-शिष्य परंपरा ज्ञान के हस्तांतरण से आगे बढ़कर व्यक्ति के सर्वांगीण विकास और जीवन-दृष्टि के निर्माण की परंपरा रही है। आज जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, जलवायु परिवर्तन और तेजी से बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां हमारे सामने नई चुनौतियां और अवसर प्रस्तुत कर रही हैं, तब शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

प्रो. बंसल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उत्तर दे सकती है, लेकिन सही प्रश्न पूछना शिक्षक सिखाता है। उन्होंने कहा कि तकनीक शिक्षा की सहयोगी हो सकती है, लेकिन मानव संवेदना, विवेक, नैतिकता और मूल्य-आधारित निर्णय का स्थान नहीं ले सकती।

कुलपति ने अपने संदेश में विशेष रूप से आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय की संकल्पना पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय वह है जो अपने शिक्षकों की प्रतिभा, शोधार्थियों की जिज्ञासा और विद्यार्थियों की ऊर्जा को संस्थागत शक्ति में परिवर्तित करता है, जो ज्ञान को नवाचार में, नवाचार को उद्यम में और उद्यम को रोजगार एवं सामाजिक परिवर्तन में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।

प्रो. बंसल ने शिक्षकों से अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता, परामर्श, तकनीकी हस्तांतरण और अंतर्विषयक सहयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में होने वाला शोध केवल शोध-पत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि वह समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम बने।

कुलपति ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के सामने एक विशिष्ट अवसर और जिम्मेदारी है। हिमालय केवल विश्वविद्यालय की भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि उसकी शैक्षणिक और शोध पहचान का आधार बन सकता है। उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन, सतत पर्यटन, पर्वतीय कृषि, पारंपरिक ज्ञान, संस्कृति और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. बंसल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक परिवार है और परिवार अपने प्रत्येक सदस्य के बिना अधूरा होता है।

प्रो. बंसल ने कहा कि हम सब मिलकर ऐसा केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाएं जो आत्मनिर्भर हो, नवाचारी हो, समावेशी हो, सतत विकास के प्रति प्रतिबद्ध हो ताकि विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभा सकें।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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