अप्रैल 2027 तक देहरा परिसर में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने के होंगे प्रयास : कुलपति
धर्मशाला, 04 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विश्वविद्यालय के प्रमुख अधिकारियों के साथ बुधवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। बैठक में जिला कांगड़ा के देहरा स्थित विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही शेष निर्माण कार्यों में तेजी लाने, लंबित बाधाओं को दूर करने तथा परिसर को शीघ्र पूर्ण कर क्रियाशील बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में सीपीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता एवं अधिशासी अभियंता के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता (शैक्षणिक), कुलसचिव, वित्त अधिकारी, विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष, अधिशासी अभियंता एवं सहायक अभियंता उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को अवगत कराया गया कि देहरा स्थायी परिसर के निर्माण एवं विकास कार्यों के लिए शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार से 50 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई है, जिसे विश्वविद्यालय द्वारा आगामी निर्माण कार्यों के निष्पादन हेतु सीपीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित कर दिया गया है।
इस महत्वपूर्ण धनराशि की उपलब्धता एवं हस्तांतरण से परियोजना के समक्ष उत्पन्न वित्तीय बाधाओं को दूर करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। इससे स्थगित निर्माण कार्यों को पुनः प्रारंभ करने तथा शेष आधारभूत संरचना के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है।
निर्माण कार्यों में हुई देरी को गंभीरता से लेते हुए कुलपति ने निर्देश दिए कि सभी स्थगित कार्य तत्काल प्रभाव से पुनः प्रारंभ किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि धनराशि उपलब्ध होने के बाद अब निर्माण स्थल पर कार्यों की प्रगति स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए तथा परियोजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय आवश्यक आधारभूत सुविधाओं एवं संसाधनों की उपलब्धता तथा निर्माण कार्यों की पूर्णता के आधार पर अप्रैल, 2027 तक अपनी शैक्षणिक गतिविधियों को देहरा स्थित स्थायी परिसर में स्थानांतरित करने की दिशा में प्रयासरत है।
देहरा स्थित स्थायी परिसर का पूर्ण विकास विश्वविद्यालय को आवश्यक स्थायी आधारभूत संरचना उपलब्ध करवाने के साथ-साथ शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करेगा। इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक क्षमता में वृद्धि होगी तथा विद्यार्थियों एवं व्यापक अकादमिक समुदाय को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने में सहायता मिलेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

