भ्रूण जांच को रोकने के लिए जनभागीदारी सबसे जरूरी : सीएमओ

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भ्रूण जांच को रोकने के लिए जनभागीदारी सबसे जरूरी : सीएमओ


धर्मशाला, 26 फ़रवरी (हि.स.)। भ्रूण की लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक केवल कानून के बल पर संभव नहीं है, इसके लिए समाज की जागरूक और सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। सीएमओ कार्यालय धर्मशाला में वीरवार को आयोजित गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एंड पीएनडीटी) अधिनियम, 1994 के तहत गठित जिला एडवाइजरी कमेटी व जिला एप्रोप्रियेट अथॉरिटी की बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. विवेक करोल ने यह बात कही।

डाॅ. विवेक करोल ने बताया कि जिले में अल्ट्रासाउंड के कुल 97 संस्थान पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि बीती तिमाही के दौरान इनके 127 निरीक्षण किए गए, 4 पंजीकरण नवीनीकरण किए गए। इसके अतिरिक्त जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 323 सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियां संचालित की गईं।

उन्होंने कहा कि भ्रूण की लिंग जांच और हत्या को रोकने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग और कानून तो अपना काम कर ही रहे हैं लेकिन साथ ही साथ समाज के सहयोग की सर्वाधिक आवश्यकता है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत गठित जिला एडवाइजरी कमेटी और जिला अप्रोप्रिएट अथाॅरिटी भ्रूण हत्या और लिंग जांच को रोकने के लिए कार्य करती है। जिसमें इससे जुड़े केंद्रों, विशेषज्ञों और आम समाज के सहयोग से सबको जागरूक किया जाता है। उन्होंने बताया कि कमेटी के परामर्श पर नए अल्ट्रासाउंड केन्द्र खोलने या बंद करने के बारे में निर्णय किया जाता है। कमेटी की अनुमति के बिना कोई व्यक्ति या संस्थान अल्ट्रासाउंड नहीं कर सकता। बैठक में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के आवेदनों पर विस्तार से चर्चा की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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