हिमाचल के स्कूलों में अब अनिवार्य होगी डिजिटल कुंडली : डॉ राजेश
धर्मशाला, 17 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया है कि अब हर विद्यार्थी की अपनी एक विशिष्ट डिजिटल पहचान होगी, जिसे पीईएन (पर्मानेंट एजुकेशन नम्बर) और अपार आईडी के नाम से जाना जाएगा। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण करना है। बोर्ड ने सभी शिक्षण संस्थानों को आगामी 31 अगस्त 2026 तक इस कार्य को अनिवार्य रूप से पूर्ण करने की समय-सीमा निर्धारित की है।
डॉ. शर्मा के अनुसार पीईएन एक 11 से 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है जो पोर्टल के माध्यम से जनरेट की जाती है। यह संख्या विद्यार्थी की पूरी शैक्षणिक यात्रा के दौरान एक समान रहेगी, जिससे उनकी प्रगति को ट्रैक करना आसान होगा। वहीं, अपार आईडी के माध्यम से छात्रों के प्रमाण पत्रों का केंद्रीकृत संग्रहण और डिजिटल सत्यापन संभव हो सकेगा, जिससे भविष्य में कॉलेज प्रवेश या नौकरी के समय कागजी कार्रवाई का बोझ कम होगा। यह व्यवस्था न केवल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखेगी, बल्कि पूरी प्रवेश प्रक्रिया को भी पारदर्शी और सरल बनाएगी।
बोर्ड अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि किसी विद्यालय ने निर्धारित समय के भीतर अपने छात्रों के लिए ये आईडी जनरेट नहीं की, तो आगामी शैक्षणिक सत्र में उनका पंजीकरण संभव नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों द्वारा इस कार्य में ढिलाई बरती जा रही है, जो स्वीकार्य नहीं है। 31 अगस्त के बाद होने वाली किसी भी असुविधा या पंजीकरण रुकने की स्थिति में संबंधित विद्यालय प्रबंधन स्वयं उत्तरदायी होगा। बोर्ड ने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे इसे प्राथमिकता के आधार पर लें ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य बाधित न हो।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

