रटने की परंपरा होगी खत्म, अब 'डिजिटल होलिस्टिक कार्ड' से होगा छात्रों का 360 डिग्री मूल्यांकन

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रटने की परंपरा होगी खत्म, अब 'डिजिटल होलिस्टिक कार्ड' से होगा छात्रों का 360 डिग्री मूल्यांकन


धर्मशाला, 07 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत हिमाचल प्रदेश के स्कूली छात्रों के मूल्यांकन का तरीका अब पूरी तरह से बदलने वाला है। केवल परीक्षा के अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि अब छात्रों की रचनात्मकता, जीवन कौशल और नैतिक मूल्यों के आधार पर भी उनकी प्रतिभा को आंका जाएगा। इसके लिए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड राज्य में जल्द ही 'डिजिटल होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड' लागू करने जा रहा है। इस नई मूल्यांकन प्रणाली की बारीकियां और देश भर के अन्य बोर्ड्स की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियां सीखने के लिए बोर्ड का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल गुजरात के गांधीनगर से दो दिवसीय गहन मंथन कर वापस लौटा है।

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि शिक्षा बोर्ड के एक प्रतिनिधिमंडल ने गांधीनगर (गुजरात) स्थित स्कूल ऑफ अचीवर्स में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लिया। इस दल में अतिरिक्त सचिव डॉ. अंबिका जोशी, सहायक सचिव विपन कुमार और शैक्षणिक अधिकारी डिम्पल कंवर शामिल थीं। कार्यक्रम के दौरान हिमाचल के दल ने देश के विभिन्न शिक्षा बोर्डों द्वारा विकसित किए जा रहे डिजिटल मूल्यांकन, दक्षताधारित सिस्टम और शिक्षकों की क्षमता निर्माण से जुड़े नवाचारों का विस्तृत अध्ययन किया तथा अपने अनुभव भी साझा किए।

क्या है 360 डिग्री समग्र मूल्यांकन

डॉ. राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि 'डिजिटल होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड' विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान और परीक्षा परिणामों तक सीमित रखने वाली व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह उनके 360 डिग्री समग्र विकास को मापने का एक प्रभावी टूल है। इसके माध्यम से बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनके कौशल, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, संचार क्षमता, जीवन कौशल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का सटीक और व्यापक आकलन किया जाएगा। इससे यह समझने में आसानी होगी कि बच्चे ने वास्तविक रूप से क्या और कितना सीखा है।

हिमाचल की शिक्षा गुणवत्ता में आएगा बड़ा बदलाव

इस राष्ट्रीय कार्यक्रम से सीखी गई सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अब हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में लागू किया जाएगा। बोर्ड अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि राज्य में डिजिटल होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड लागू होने से विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को एक पारदर्शी, व्यापक और अत्यधिक विश्वसनीय मूल्यांकन प्रणाली मिलेगी। यह नई पहल प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने और स्कूली शिक्षा को पूरी तरह से छात्र-केंद्रित व प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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