शिक्षा में पारदर्शिता, संस्कार और गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता : डॉ राजेश शर्मा

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शिक्षा में पारदर्शिता, संस्कार और गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता : डॉ राजेश शर्मा


धर्मशाला, 20 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने शनिवार को जनजातीय क्षेत्र भरमौर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक डे बोर्डिंग स्कूल का दौरा कर शैक्षणिक गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करते हुए शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

डॉ. राजेश शर्मा ने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों से रू-ब-रू होकर उनकी पढ़ाई, परीक्षाओं तथा भविष्य की योजनाओं को लेकर सवाल-जवाब किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य विद्यार्थियों और स्कूल प्रबंधन के बीच ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से पारदर्शी संवाद स्थापित करना है, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।

उन्होंने कहा कि बोर्ड लगातार शिक्षा व्यवस्था को सरल और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। जिससे परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनाया जा सके।

दौरे के दौरान स्कूल प्राचार्य ने संस्थान की उपलब्धियों, शैक्षणिक गतिविधियों तथा विभिन्न चुनौतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। स्कूल प्रबंधन द्वारा कुछ समस्याएं भी बोर्ड अध्यक्ष के समक्ष रखी गईं। इस पर डॉ. शर्मा ने कहा कि इनमें से कुछ मुद्दे सीधे तौर पर शिक्षा बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, लेकिन वह एक मैसेंजर के रूप में इन समस्याओं को शिक्षा विभाग तक पहुंचाने का कार्य करेंगे, ताकि उनके समाधान की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा सकें।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा स्कूलों में संस्कारयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यपुस्तकों में विशेष विषय शामिल करने की योजना पर बोलते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा बोर्ड ने इस दिशा में एक समिति का गठन कर दिया है। समिति की सिफारिशों के आधार पर मुख्यमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें नैतिक मूल्यों और संस्कारों का समावेश भी आवश्यक है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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