धर्मशाला कॉलेज छात्रा मौत मामला : मंगलवार को यूजीसी की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी करेगी जांच
धर्मशाला, 05 जनवरी (हि.स.)। धर्मशाला कॉलेज की छात्रा मौत मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। इस मामले में अभी तक पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है। वहीं अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देशों पर गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी कल मंगलवार को जांच के लिए धर्मशाला कॉलेज पहुंचेगी। यह कमेटी सात जनवरी को मामले की जांच की जाएगी। वहीं राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा निदेशालय में अतिरिक्त निदेशक (कॉलेज) डॉ. हरीश कुमार के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी गठित की है। यह जांच दल धर्मशाला कॉलेज में रैगिंग और यौन उत्पीड़न मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है।
दरअसल, पल्लवी ने अपने अंतिम सांस लेने से पहले अस्पताल में दो वीडियो बनाए। इनमें डाइंग डिक्लेरेशन में पल्लवी कहती है कि तीन छात्राओं ने उसके साथ मारपीट की। पल्लवी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक कुमार पर भी बेड टच के आरोप लगाती है।
उधर पल्लवी की मौत के बाद परिजनों ने पुलिस को दी शिकायत में चार छात्राओं समेत असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक कुमार पर एफआईआर दर्ज कराई। हालांकि प्रोफेसर अशोक कुमार को सरकार ने सस्पेंड कर दिया है और जांच पूरी होने तक शिक्षा निदेशालय शिमला में हेडक्वार्टर फिक्स किया गया है।
इस मामले में परिजनों ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए। पुलिस अब मामले की गहनता से जांच में जुट गई है। इस बीच यूजीसी ने भी घटना पर संज्ञान लिया और यूजीसी की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी इस मामले में जांच कर रही है। यह कमेटी भी आज कॉलेज पहुंच कर साक्ष्य जुटा रही है।
वहीं राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी भी अपने स्तर पर जांच में जुट गई है। इस मामले में छात्रा का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। अब उसकी मौत के कारणों का सही पता लगाने में बेशक पुलिस को काफी मेहनत करनी पड़ेगी। जिसके लिए मृतका के दोस्त और कॉलेज सहपाठी भी मुख्य कड़ी बन सकते हैं।
उधर डॉ. हरीश कुमार की अगुवाई में धर्मशाला कॉलेज पहुंची एसआईटी ने प्रशासन से संबंधित सभी रिकॉर्ड तलब किए। टीम ने मृतक छात्रा के सहपाठियों से उसके व्यवहार के संबंध में पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। सहपाठियों ने बताया कि छात्रा का व्यवहार सामान्य था और वह अधिकतर अकेली रहती थी। जांच के दौरान रैगिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। कॉलेज के दो छात्रों ने समिति के समक्ष उपस्थित होकर रैगिंग से संबंधित अपना पक्ष रखा। समिति ने इन बयानों को दर्ज कर लिया है, जो जांच रिपोर्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे।
पुलिस ने 5 अस्पतालों से रिकॉर्ड कब्जे में लिया
वहीं इस मामले में पुलिस सभी छह अस्पतालों से रिकॉर्ड कब्जे में ले चुकी है। दरअसल, पल्लवी का इलाज जोनल अस्पताल धर्मशाला, टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा, फोर्टिस कांगड़ा, सिटी अस्पताल कांगड़ा, महाजन मेडिसिन अस्पताल पठानकोट और डीएमसी लुधियाना से कराया गया। ऐसे में इन अस्पतालों का रिकॉर्ड पल्लवी की मौत मामले में अहम साबित होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

