केंद्र सरकार के दावों और हिमाचल को मिली वास्तविक वित्तीय सहायता में बड़ा अंतर : कांग्रेस

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धर्मशाला, 14 जून (हि.स.)। कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल एवं भवानी सिंह पठानिया ने धर्मशाला में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा द्वारा हाल ही में हिमाचल प्रदेश को लेकर किए गए दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि घोषित सहायता और वास्तविक रूप से प्राप्त वित्तीय सहयोग के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके जे.पी. नड्डा तथा पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में हिमाचल प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर कई टिप्पणियां की गईं जोकि पूरी तरह निराधार हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत हिमाचल प्रदेश जैसे विशेष श्रेणी के राज्यों में 90 :10 के अनुपात में वित्तीय साझेदारी की जाती है, जिसमें 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है। लेकिन वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य दावों पर लगभग 155 करोड़ रुपये के व्यय के मुकाबले केंद्र से मात्र 49 करोड़ रुपये की राशि ही प्राप्त हुई है। यदि केंद्र वास्तव में अपनी 90 प्रतिशत जिम्मेदारी निभा रहा होता तो प्रदेश सरकार को अपने सीमित संसाधनों से अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक मरीजों के उपचार पर लगभग 599 करोड़ रुपये के दावे बने, जबकि इस अवधि में केंद्र का कुल योगदान लगभग 310 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर राज्य सरकार को अतिरिक्त रूप से लगभग 247 करोड़ रुपये का वित्तीय भार उठाना पड़ा। यह स्थिति स्वयं इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार के दावों और वास्तविक सहायता के बीच गंभीर अंतर मौजूद है।

सबसे पहला प्रश्न यह है कि यदि जयराम ठाकुर को वर्ष 2019-20 में ही यह जानकारी थी कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) भविष्य में बंद होने वाला है, तो उन्होंने प्रदेश की जनता, कर्मचारियों और प्रशासन को इसके लिए क्यों तैयार नहीं किया? यदि यह जानकारी वास्तव में उनके पास थी, तो आने वाली सरकार को आगाह करना और वित्तीय प्रबंधन को उसी अनुरूप व्यवस्थित करना उनकी जिम्मेदारी थी।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल (2017-2022) के दौरान प्रदेश को केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान और जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता प्राप्त हुई। इसके बावजूद भाजपा सरकार प्रदेश को लगभग 75 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ के साथ छोड़ गई। यदि इतने बड़े वित्तीय संसाधन उपलब्ध थे, तो फिर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत क्यों नहीं किया गया? कर्मचारियों के लंबित एरियर और अन्य देनदारियां क्यों नहीं चुकाई गईं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रभावित हिमाचल प्रदेश को 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता देने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक यह राशि प्रदेश को प्राप्त नहीं हुई। केंद्र सरकार की टीमों ने वर्ष 2023 और 2024 की आपदाओं के बाद प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया है। सभी परियोजनाओं और क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा केंद्र सरकार के पास उपलब्ध है। ऐसे में यह कहना कि हिमाचल प्रदेश ने सहायता के उपयोग का विवरण नहीं दिया, पूरी तरह तथ्यहीन है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार वित्तीय अनुशासन स्थापित करने, अनावश्यक खर्चों में कटौती करने और सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बिजली बोर्ड, परिवहन निगम और अन्य सरकारी संस्थानों में सुधार की प्रक्रिया जारी है, जिसके सकारात्मक परिणाम आने शुरू हो चुके हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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